संस्कृति संसद आयोजन समिति की अध्यक्ष राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली व गंगा महासभा के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संस्कृति संसद नूतन भारत के नवीन स्वरूप को तय करेगी। देश की सांस्कृतिक राजधानी में 12 से 14 नवंबर तक होने वाली संस्कृति संसद में धर्म और राष्ट्र के स्वरूप पर मंथन होगा। संसद से निकलने वाला विमर्श भारत को नया विमर्श प्रदान करेगा।
बुधवार को छोटी गैबी सिद्धगिरि बाग स्थित ब्रह्मनिवास पर पत्रकारवार्ता के दौरान सांसद रूपा गांगुली ने कहा कि संस्कृति संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रतिनिधित्व करने वाले संत, आचार्य और विद्वान शामिल होंगे। 12 से 14 नवंबर तक काशी विद्वत परिषद एवं गंगा महासभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन संपन्न होगा।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संस्कृति संसद का यह चौथा आयोजन होगा। इस आयोजन के स्थल का निर्धारण वर्ष 2019 में तीर्थराज प्रयाग में आयोजित कुंभ के दौरान हुई संसद में ही तय कर लिया गया था। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि संस्कृति संसद में सनातन धर्म पर उठने वाले सभी प्रश्नों के जवाब दिए जाएंगे। यह संसद विधर्मियों के दुष्चक्रों का जवाब भी देगी। इस दौरान गोविंदनारायण शर्मा, प्रमोद मिश्रा, नीरज बदलानी, सुधीर सिंह, मंजू मिश्र मौजूद रहे।