हमने कभी पंथ, संप्रदाय, मजहब के आधार पर मनुष्य को अलग करने की कभी कोशिश नहीं की। हमारा धर्म केवल मानव ही नहीं जीवों, वनस्पतियों के लिए कल्याणकारी है। इसी वजह से इसे सनातन कहते हैं। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि सनातन संस्कृति पर टिप्पणी करने वालों को इसकी महत्ता की जानकारी नहीं है। इस तरह के अनर्गल बातों का कोई मतलब नहीं होता है। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्र स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि राष्ट्र की एकता और अखण्डता के उद्घोष के लिए संस्कृति संसद में सनातन के सभी 127 सम्प्रदायों के संतों की जुटान होगी।
टूलकिट के माध्यम से सनातन धर्म पर जो हमले किए जा रहे हैं उसका मुंहतोड़ उत्तर संस्कृति संसद में दिया जायेगा। चकिया से भाजपा विधायक कैलाश खरवार ने कहा वनवासी समाज के लोगों को बरगला कर धर्मान्तरण का षड्यंत्र चल रहा है। इसका भी एकजुटता के साथ जवाब देना होगा। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि सनातन संस्कृति से युवा जुड़ रहे है।
उनमें जागरूकता आई है। भारत को ज्ञान के केन्द्र के रूप में स्थापित करना मुख्य उद्देश्य है। कार्यक्रम का संचालन गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामन्त्री (संगठन) गोविंद शर्मा, धन्यवाद ज्ञापन काशीविद्वत परिषद् के महामन्त्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने किया।