तटीय गांवों को डुबो कर शहर में घुसी गंगा की बाढ़ ने हाहाकार मचा दिया है। आधी रात जलस्तर स्थिर तो हुआ लेकिन भोर में दोबारा बढ़ाव से कई नए इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए। घरों तक लहरों का प्रवाह तेज होने से स्थिति भयावह हो गई है। रमना में दो विदेशी पर्यटकों को प्रधानपति के साथ ग्रामीणों ने बाहर निकाला। तेलियानाला में लहरों की चपेट में आई मछुआरों की नाव बहने लगी। दो युवकों ने कूद कर जान बचाई।
बाकी दो को एनडीआरएफ और पुलिस ने बचाया। घरों की पहली, दूसरी मंजिल पर फंसे हजारों लोगों को बाहर निकालने की जद्दोजहद जारी है। राहत सामग्री के लिए छीना-झपटी मची रही। बुधवार को दिन में 10 घंटे में जलस्तर में दो सेमी वृद्धि हुई। दिन के 11 बजे से रात 12 बजे तक 72.56 मीटर पर गंगा स्थिर हैं।
दशाश्वमेध के सघन बाजार तक बुधवार को लहरें हिलोरे मारती रहीं। नालियों से होकर बाबा विश्वनाथ के डेढ़सी पुल द्वार तक गंगा ने दस्तक दे दी। अस्सी में देवरहवा बाबा आश्रम से आगे गंगा बढ़ गई। बीमारों, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
सामने घाट- नगवा मार्ग से बढ़कर गंगा बीएचयू ट्रामा सेंटर प्रवेश द्वार से आगे बढ़ गई। केंद्रीय जल आयोग ने अब गंगा की बाढ़ पर विराम लगने का संकेत दिया है। चंबल ,केन, बेतवा से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। अन्य सहायक नदियों की भी रफ्तार थम गई है। देर शाम इलाहाबाद में गंगा में घटाव भी शुरू हो गया। इससे वाराणसी में भी बाढ़ की विभीषिका पर ब्रेक लगने की उम्मीद बढ़ गई है।