Varanasi News: उर्स के मौके पर दरगाह पर अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ पड़ा। बच्चों ने छोटी ईद के मेले का लुत्फ उठाया। वहीं बुजुर्गों ने एक-दूसरे से गले मिलकर बधाईयां दीं।
ईद के छठवें दिन छोटी ईद का उल्लास छाया रहा। मंडुवाडीह स्थित हजरत मकदूम शाह तैयब बनारसी की दरगाह पर छोटी ईद का मेला लगा। अकीदतमंदों ने आस्ताने पर फातिहा पढ़ी। बच्चों के साथ बड़ों ने यहां छोटी ईद की खुशियां बांटी। बच्चों ने खिलौने व चटपटे व्यंजनों का लुत्फ उठाया। दरगाह पर देर रात तक जियारत करने वालों की भीड़ लगी रही।
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हजरत मकदूम शाह तैयब बनारसी का उर्स छोटी ईद के तौर पर मनाया जाता है।
दरगाह परिसर में फातिहा पढ़ने और मन्नत की चादर चढ़ाने के लिए अकीदतमंद सुबह से ही पहुंचने लगे थे। चुनार के बिस्कुट, लच्छा पराठा, हर तरह के पकौड़ियां, खिलौने, शृंगार की सामग्री आदि की सजी अस्थायी दुकानें सजी थीं। जहां बच्चों और महिलाओं की भीड़ थी। वहीं, दरगाह पर इशां की नमाज के बाद बाबा की डाली निकाली गई। मौलाना नूर आलम की निगरानी में गुस्ल, इत्र की चादरपोशी हुई। देर रात तक कव्वाली की महफिल सजी रही।
दिन भर रखा नफिल रोजा
ईद के बाद छोटी ईद तक काफी अकीदतमंदों ने नफिल रोजा रखा। बुधवार को अजान के साथ उन्होंने रोजा खोला और मगरिब की नमाज अदा की। फिर दरगाह में लगे मेले में शिरकत की। मौ. हारुन रसीद नक्शबंदी ने बताया कि नफिल रोजे की अहमियत काफी है। इस रोजे को रखने वाले को एक साल के रोजे के बराबर सवाब मिलता है।