वाराणसी। खंडग्रास के रूप में काशी में दिखे चैत्र पूर्णिमा के चंद्र ग्रहण का मोक्ष होते ही शनिवार की रात गंगा में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। गंगा घाटों पर शाम से ही ही मोक्ष के लिए जप, ध्यान और कीर्तन के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। तटीय भवनों की छतों, मढ़ियों के अलावा पार्कों से लोगों ने चंद्रग्रहण का नजारा लिया। ग्रहण को कैमरे में कैद करने की होड़ मची रही। मोक्ष के बाद रात आठ बजे हुई गंगा आरती। आरती देखने के लिए नावों-बजरों पर विदेशी पर्यटकों का तांता लगा रहा।
काशी में चंद्रोदय शाम 6:13 बजे हुआ। इससे पहले ग्रहण लग चुका था। खंडग्रास के रूप में जब चांद उगा तब ग्रहण का मध्य भी पूरा हो चुका था। इससे पहले सूतक लगने की वजह से सुबह 9:15 बजे ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। काशी विश्वनाथ मंदिर के कपाट शाम चार बजे बंद किए गए। शाम को 7:15 पर मोक्ष के बाद गंगा किनारे उमड़ी आस्थावानों की भीड़ के बीच हर हर महादेव के
जयकारे लगने लगे। इसी के साथ गंगा में डुबकी लगने लगी। एहतियातन घाटों पर जल पुलिस के जवान निगरानी में लगे थे। दशाश्वमेध, शीतला घाट, प्रयाग घाट, अहिल्याबाई घाट, सिंधिया घाट, मीर घाट के अलावा रामघाट, पंचगंगा घाट, प्रह्लाद घाट, गाय घाट, राजघाट पर उमड़े लोगों ने गंगा में गोता लगाया। अस्सी घाट पर भी ग्रहण स्नान के लिए भीड़ उमड़ी। यहां भी मोक्ष से पहले पूजा, अनुष्ठान होते रहे। मंदिरों पर भजन मंडलियां राम नाम संकीर्तन में जुटी थीं। स्नान के बाद दीये भी गंगा तटों पर जलाए गए। अन्न, वस्त्र का दान गरीबों को किया गया।