ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने की मांग को लेकर वर्ष 1991 में मुकदमा दाखिल किया गया था। इस मुकदमे के वादी पक्षकार हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनकी तीन पुत्रियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेनू पांडेय ने पिता के स्थान पर पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने के लिए भी प्रार्थना पत्र दिया था।
सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत ने 11 जुलाई 2025 को दोनों मांगों से संबंधित प्रार्थना पत्रों को पोषणीयता के आधार पर खारिज कर दिया था। इस आदेश को तीनों बहनों की ओर से अधिवक्ता ने पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। इसी याचिका पर विशेष न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में सुनवाई चल रही है। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से पुनरीक्षण याचिका पर आपत्ति दाखिल कर अपना पक्ष रखा जा रहा है।