उधर भवन खंड के सहायक अभियंता आशुतोष सिंह और अवर अभियंता मनोज सिंह को अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। इसके चलते अवधेश के 48 लाख रुपये के भुगतान अभी बकाया है। क्योंकि अवर अभियंता को एमबी बनाकर देना पड़ता है, जिसके बाद भुगतान होता है। अभी अवर अभियंता जेल में हैं। ठेकेदार के परिवार और परिचितों के अनुसार कबीरचौरा के एमसीएम विंग का 4.5 करोड़ रुपये बकाया है।
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सेटिंग के माहिर खिलाड़ियों के संपर्क में अभियंता :
सूत्रों की मानें तो अवधेश प्रकरण में आरोपी अभियंता सेंटिंग के माहिर खिलाड़ियों के संपर्क में हैं। बनारस से लेकर लखनऊ तक शासन प्रशासन में बैठे लोगों से जुगाड़ लगा रहे हैं ताकि बच निकलने का रास्ता बन सके। दरअसल सुसाइड नोट में जिनका नाम है उस पर सारा ठीकरा फोड़ने की तैयारी अंदर अंदर चल रही है।
अवर अभियंता और सहायक अभियंता को भेजा गया जेल :
पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर के कक्ष में ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव द्वारा आत्महत्या करने के मामले में गिरफ्तार किए गए पीडब्ल्यूडी के दो इंजीनियरों को प्रभारी सीजेएम सुरेंद्र प्रताप यादव की अदालत में शनिवार को पेश किया गया। अदालत ने दोनों आरोपियों अवर अभियंता मनोज सिंह व सहायक अभियंता आशुतोष सिंह को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। वहीं, कोर्ट में सहायक अभियंता आशुतोष सिंह की ओर से जमानत के लिए आवेदन दिया गया है, जिसे सुनवाई के बाद अदालत ने खारिज कर दिया।
कैंट पुलिस ने शुक्रवार को मनोज और आशुतोष सिंह को गिरफ्तार किया था। अवधेश के सुसाइड नोट और कैंट थाने में दर्ज मुकदमे के आधार पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। अन्य छह नामजद आरोपियों के खिलाफ तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस तथ्यों की जांच और इसे एकत्रित करने में जुटी है।