गणेश के अनुसार उन्होंने उदय नारायण, प्रदीप कुमार और अरुण सिंह के खिलाफ पुलिस, जिलाधिकारी, मानवाधिकार आयोग, मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री संसदीय कार्यालय में शिकायत की, लेकिन कहीं से न्याय नहीं मिला। हर बार मेरी शिकायत को रफादफा कर उल्टे मेरे ऊपर ही मुकदमा लिखा गया।
तीनों ने चेक बुक तक दस्तखत कर जबरन अपने पास रखवा लिया है। बलिया की पुलिस पर मुझे भरोसा नहीं है, वाराणसी में मरने पर यहां की पुलिस इंसाफ दिलाएगी। बेटी की शादी करनी है, लेकिन फिर भी विवश होकर मर रहा हूं। मरने के बाद मेरी बेटी मेरे बारे में क्या सोचेगी...?
ये भी पढ़ें : बीएचयू में दो हॉस्टर के छात्रों में मारपीट, मौके पर पुलिस बल तैना
आत्महत्या का उपाय सोच रहा हूं और डर रहा हूं :
गणेश 14 सितंबर को होटल में आए और उसी दिन उन्होंने 11 पेज का सुसाइड नोट लिखा। आत्महत्या की दो बार कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए। सोमवार को उन्होंने सुसाइड नोट में दो और पेज जोड़े। इन दोनों पेज में उन्होंने बीते दो दिनों का उल्लेख किया। लिखा कि आत्महत्या का उपाय सोच रहा हूं और डर रहा हूं।
जहर खाने की कोशिश किया लेकिन दुर्गंध के कारण असफल रहा। हाथ की नस काटने की कोशिश किया लेकिन नहीं काट पाया। इसके बाद एक दुकान से स्टूल लेकर आया और अब फांसी लगाने जा रहा हूं।