इसके बाद डीएम अनुराग पटेल ने कार्रवाई करते हुए बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी व डीसी एमडीएम रविंद्र कुमार मिश्र के खिलाफ शासन को पत्र लिख दिया। कहा कि यह एक साजिश थी। त्वरित कार्रवाई में शासन से बीएसए का स्थानांतरण प्रयागराज डायट में कर दिया गया। साथ ही जिला प्रशासन को साजिश करने वाले संबंधित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया।
इसी क्रम में शनिवार को खंड शिक्षाधिकारी प्रेमशंकर राम ने आरोपी प्रधान प्रतिनिधि राजकुमार पाल व और एक तथाकथित पत्रकार पवन जायसवाल के साथ एक अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। मामले में पुलिस ने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजकुमार पाल को उसके घर सिऊर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उसके बाद से ही मामला गर्मा गया है।
राजनीतिक दलों ने संभाला मोर्चा :
इतनी कार्रवाई के बाद वर्तमान में राजनीतिक दलों ने इस मामले में मोर्चा संभाल लिया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि इस सरकार में पत्रकारों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। एक तो वह बच्चों को नमक रोटी खिला रहे हैं। दूसरी ओर यदि कोई उसे उजागर कर रहा है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। यह अत्यंत निंदनीय है। वहीं कांग्रेस ने भी इस संबंध में ट्वीट कर इस मामले के लिए प्रदेश सरकार को दोषी ठहराया है।
मिर्जापुर के प्रभारी बीएसए और सीडीओ प्रियंका निरंजन ने बताया कि जांच समिति की जांच में यह पाया गया कि यह कार्रवाई साजिशन की गई और प्रधानपति ने जानबूझकर संबंधित पत्रकार को बुलाकर वीडियो बनवाया और उसे वायरल कराया। इसलिए उनपर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। विद्यालय में पूरा कन्वर्जन कास्ट और खाद्यान्न है। ऐसा जानबूझ कर कराया गया है।
सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव ने योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इस योगी राज में पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा है। पत्रकारों के खिलाफ कई घटनाएं हो चुकी हैं। बच्चों को नमक रोटी खिलाया जा रहा है और यदि कोई उसे सामने लाता है तो उसका भी उत्पीड़न किया जाता है। अध्यक्ष जी ने ठीक कहा है। इस मामले में जैसा उनका निर्देश होगा, किया जाएगा।