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डिब्बा, पंटर, सेशन जैसे शब्दों के सहारे आईपीएल में सट्टेबाजी

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वाराणसी। क्राइम ब्रांच और आदमपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए नितिन पांडेय, गुड्डू और प्रकाश निगम ने बताया कि आईपीएल के मैचों में सट्टेबाजी के लिए कोड युक्त भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे, बुकी के लिए डिब्बा, एजेंट के लिए पंटर, क्लाइंट के लिए लाइन, भाव के लिए डिब्बे की आवाज, 20 ओवर के लिए लंबी पारी, 10 ओवर के लिए सेशन, एक लाख के लिए एक पैसा, 50 हजार के लिए अठन्नी, 25 हजार के लिए चवन्नी...। खास सावधानी यह बरती जाती है कि एक मोबाइल नंबर का उपयोग दोबारा नहीं किया जाता है। मौजूदा समय में दांव लगाने के लिए व्हाट्स ऐप या गूगल प्ले पर उपलब्ध ऐप के सहारे बातचीत की जाती है।
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एसपी क्राइम ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद ने बताया कि आईपीएल की सट्टेबाजी का अवैध धंधा चार स्तरों पर संचालित होता है। आरोपियों ने बताया कि शहर में 10 या 12 प्रमुख सटोरिया होते हैं जो मुंबई, कोलकाता और नई दिल्ली में बैठे बुकी के संपर्क में रहते हैं। मुखिया बनने के लिए सटोरिया को बुकी के पास एडवांस पैसा जमा करना होता है। इसके बाद सटोरिया शहर में अपने अलग-अलग एजेंट बनाता है और उनसे एक निर्धारित रकम जमा करता है। एजेंट अपने स्तर पर लड़के तैयार करते हैं और वो आम लोगों से चाय-पान की दुकानों या अन्य जगह पर संपर्क कर उन्हें सट्टेबाजी में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। जो पैसा जीतता है, उसके खाते में सीधे आनलाइन ट्रांसफर किया जाता है या फिर पूर्व निर्धारित जगहों पर हाथोंहाथ दे दिया जाता है। सट्टेबाजों का यह जाल देश के महानगरों से लेकर नेपाल और दुबई तक फैला हुआ है। समूचे नेटवर्क का सुप्रीम बॉस कौन है, यह कोई नहीं जानता है।
एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि बरामद 11 रजिस्टर में जितने लोगों के नाम, पते और मोबाइल नंबर दर्ज हैं, उनसे क्राइम ब्रांच की टीम पूछताछ करेगी। बरामद सभी आठ मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। जिस किसी की भी संलिप्तता उजागर होगी वो जेल जाएगा। इसके साथ ही तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने वाले क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह, इंस्पेक्टर आदमपुर आशुतोष कुमार ओझा, एसआई प्रदीप यादव, सुमंत सिंह, पुनदेव सिंह, रामभवन यादव, सुरेंद्र मौर्या, घनश्याम वर्मा, कुलदीप सिंह, चंद्रसेन सिंह, रामबाबू की टीम को आईजी रेंज और एडीजी जोन से पुरस्कृत कराने के लिए संस्तुति की जाएगी।
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