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518 करोड़ खर्च के बाद भी प्यासी है काशी

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वाराणसी। काशी का दुर्भाग्य कहें या फिर शासन और प्रशासन की लापरवाही, 500 करोड़ के खर्च होने के बाद भी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई, जिसके चलते आज भी काशी की जनता प्यासी है। गंगा तट होने के बाद भी लोगों को शुद्घ पेयजल के लिए संकट से जूझना पड़ रहा है। एक दो साल पहले ही पूरी होने वाली योजनाएं आज तक पूरी नहीं हो पाई हैं। ऐसे में अभी भी इन योजनाओं को पूरा करने में कम से कम दो माह तक का समय और लगेगा।
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ट्रांस वरुणा को मिलाकर 16 लाख की आबादी को पानी पिलाने के लिए जेनर्म योजना के तहत प्रोजेक्ट तैयार हुआ। 2015 में शुरू की गई योजना को वर्ष 2017 तक पूरा करना था। इसके लिए कुल तीन चरणों में योजना को बांटा गया था। तीन चरणों की इस योजना में पहले चरण में पाइप लाइन डालना, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाना था। इसके साथ ही चंद्रावती से गंगा का पानी लिफ्ट करके डब्ल्यूटीपी ले जाना फिल्टर करके टंकियों में सप्लाई करने के अलावा उन टंकियों से शहर में पेयजल की सप्लाई करने की योजना बनी थी, लेकिन 2017 में पूरी होने वाली योजना 2019 तक भी पूरी नहीं हो पाई। अभी पूरा होने में एक से दो माह का समय लगेगा।
जेनर्म की इन योजनाओं में इस कदर भ्रष्टाचार हुआ कि जब पहली बार दो साल पहले इन पाइन लाइनों में पानी छोड़ा गया तो शहर के अधिकतर मार्ग जलमग्न हो गए। स्थिति यह है कि टंकियों में पानी नहीं पहुंच पाया और कॉलोनियों में भर गया। इसकी जांच शुरू हुई तो कई अधिकारी संस्पेंड हो गए। लिहाजा इन योजनाओं को फिर से नए स्तर से जांच कराकर पूरा करने का निर्देश दिया गया था।
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