वाराणसी में जमानत पर जेल से छूट कर बाहर आने वाले बदमाशों की गतिविधियों की निगरानी न होने से वह शांति और कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाते हैं। यदि पुलिस इन बदमाशों पर गंभीरता से नजर रखे तो काफी हद तक आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। इसी तरह से हिस्ट्रीशीटरों और थानों के टॉप-5 व टॉप-10 अपराधियों की निगरानी में भी पुलिस हद दर्जे की लापरवाही बरतती है। नतीजतन, वह भी आए दिन कानून व्यवस्था को चुनौती देते नजर आते हैं। कानून व्यवस्था के जानकारों का कहना है कि आरक्षी अपने क्षेत्र के संभ्रांत और दुर्दांत किस्म के लोगों को जानते ही नहीं हैं। इस वजह से वह थानेदार या चौकी प्रभारी को सही सूचनाएं नहीं दे पाते हैं और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अपने मंसूबे को अंजाम देने में सफल रहते हैं।
छितूपुर का अर्जुन देव हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया था। पुलिस की नजर उसकी गतिविधियों पर नहीं थी तो वह रंगदारी मांगने के साथ ही शिवपुर क्षेत्र में एक व्यक्ति की हत्या की फिराक में लग गया। जिससे रंगदारी मांगी थी, जब उसने सूचना दी तो पुलिस फिर सक्रिय हुई। अंतत: अर्जुन देव पकड़ कर फिर जेल भेजा गया।
बीते साल मुठभेड़ में मारे गए एक लाख के इनामी बदमाश रोशन गुप्ता उर्फ किट्टू का साथी नरोतमपुर निवासी मनीष सिंह उर्फ सोनू जमानत पर जेल से बाहर आया तो जरायम जगत में फिर सक्रिय हो गया। चौकाघाट दोहरे हत्याकांड और मिर्जापुर के चुनार में एक फैक्ट्री के अधिकारी की हत्या में उसका नाम आया। साथ ही किट्टू से मुठभेड़ के दौरान सोनू पुलिस को चकमा देकर भाग गया।
वाराणसी के एसएसपी अमित पाठक का कहना है कि जमानत पर छूटने वाले बदमाशों की गतिविधियों की नियमित निगरानी के लिए थानेदारों को लगातार चेताया जाता रहता है। जो भी इसमें लापरवाही बरतते हैं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाती है।