पहाड़ों पर तेज वर्षा के चलते गंगा, गोमती समेत अन्य सहायक नदियों में भारी उफान आने की आशंका है। सोमवार को काशी में गंगा का जलस्तर 68 मीटर पर पहुंच गया। इस बढ़ाव से तटीय बस्तियों में दुश्वारियां बढ़ने लगी हैं। वरुणा किनारे के घरों मेंपानी भरने से पलायन शुरू हो गया। शीतला मंदिर का गर्भगृह डूब गया। मशानेश्वर मंदिर भी डूब गया है।
श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार और दैनिक गंगा आरती पर असर पड़ गया है। नावों का संचालन रोक दिया गया है। केंद्रीय जल आयोग ने तीन सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गंगा में बढ़ाव की पुष्टि की है। फिलहाल गंगा काशी में गंगा तीन सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही हैं। आठ अगस्त की सुबह जहां जल स्तर 67.65 मीटर रहा, वहीं शाम सात बजे 68 मीटर पर पहुंचने के बाद तटीय क्षेत्रों में लोगों की चिंता बढ़ गई।
इससे एक बार फिर तटीय जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार छतों पर होने लगा है,वहीं हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में चिताएं लगाई जाने लगी हैं। देर शाम मां शीतला के गर्भगृह में गंगा की लहरें उफान मारने लगीं। मां का मुखौटा अहिलेश्वर महादेव मंदिर में ले जाया गया। अब शीतला माता की आरती अहिलेश्वर में होगी। इसी रफ्तार से जल स्तर बढ़ता रहा तो मंगलवार की सुबह तक सुबह-ए-बनारस के मंच तक पानी आ जाएगा। छतों और गलियों में चिताएं जलने लगी हैं। नौकायन ठप कर दिया गया है।