बलिया के सुरेमनपुर स्टेशन के अधीक्षक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। रेलवे कार्ड, टिकट और मूल्यवान प्रतिभूतियां गायब करने के आरोप से मुक्ति के लिए दी गई अर्जी खारिज कर दी गई है और अगली सुनवाई की तारीख 18 फरवरी दी गई है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पूर्वोत्तर रेलवे महेंद्र कुमार पाण्डेय की कोर्ट ने रेलवे टिकट गोदाम से लाखों रुपया के रेलवे कार्ड,टिकट व मूल्यवान प्रतिभूतियां गायब करने के मामले में सुरेमनपुर बलिया के तत्कालीन स्टेशन अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह की ओर से आरोप मुक्त करने संबंधित अर्जी को खारिज कर दिया साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तिथि नियत कर दी।
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प्रकरण में आरोप रहा कि वाणिज्य लिपिक श्रीवास्तव के साथ मिलकर सुरेमनपुर स्टेशन अधीक्षक मुकुल श्रीवास्तव अपने सहयोगी तत्कालीन स्टेशन मास्टर चन्द्रिकाराम तथा क्लर्क योगेन्द्र नाथ ओझा के द्वारा आपराधिक षड्यन्त्र एवं दुष्प्रेरण से प्राप्त रेलवे टिकटों एवं मूल्यवान प्रतिभूतियों को धोखाधड़ी के इरादे से बेचकर स्वयं व अन्य को अवैध लाभ पहुंचाया गया।
ब्लैक पेपर टिकट में धोखाधड़ी व बदनियती से जालसाजी कर रेलवे के रिकार्ड में हेराफेरी कर रेल राजस्व को क्षति पहुंचायी गयी। इस मामले सुलेमन पुर के रेलवे अधीक्षक ओपी सिंह के भी नाम प्रकाश में आने पर आरोपी बनाया गया। परिवादी ने आरपीएफ बलिया में रिपोर्ट दर्ज कराया। इस मामले में विचारण के दौरान एक आरोपी चंदिका राय की मौत हो गई।
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आरोपी ओमप्रकाश सिंह की ओर से कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप मुक्त करने की गुहार लगाई गई। आरोपी की ओर से कहा गया कि घटना के समय सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक के पद पर नियुक्त थे। उसके पास से कोई भी टिकट या रेलवे की सम्पत्ति बरामद नहीं की गई है। किसी भी आपराधिक षड्यन्त्र अथवा दुष्प्रेरण करने का कोई साक्ष्य न तो पत्रावली पर उपलब्ध है।
उसके पास रेलवे टिकट भंडार व मूल्यवान प्रतिभूतियों का चार्ज भी नहीं था, बल्कि वह चार्ज चन्द्रिका राम के पास था। रेलवे सुरक्षा बल को भारतीय दन्ड संहिता की धाराओं में वाद पंजीकृत कर विवेचना किये जाने की शक्ति कानूनन प्रदान नहीं की गयी है ऐसे में उन्मोचित किए जाने के प्रयाप्त आधार है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों के सुनने और पत्रावली के अवलोकन के बाद आरोपी के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। इस मामले में पहले ही दोनों अन्य कर्मचारी पर आरोप तय हो चुका है।