हवालात में बंद आरोपियों की गिरफ्तारी रिकॉर्ड में न दिखाकर गैरकानूनी तरीके से उन्हें छोड़ने के मामले में कोर्ट ने प्रदेश सरकार और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है।
लंका थाने की हवालात में पाक्सो और भारतीय दंड संहिता के तहत गंभीर अपराध में बंद आरोपियों की गिरफ्तारी रिकॉर्ड में न दिखाकर गैरकानूनी तरीके से उन्हें छोड़ने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने प्रदेश सरकार और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। मामले में अगली सुनवाई की तिथि दो अगस्त नियत की गई है।
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वादी के अधिवक्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर दलील पेश की। मामला लंका पुलिस स्टेशन के अधिकारियों द्वारा कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और शिकायतकर्ता को धमकाने के आरोप से संबंधित है। आरोप है कि 2 जून 2024 को एक मामले में दर्ज प्राथमिकी के तहत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें लंका पुलिस स्टेशन में रखा गया।
आरोपियों में से दो को बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के रिहा कर दिया गया। प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि पुलिस रिकॉर्ड में गलत तरीके से केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी दिखाई गई। जबकि, हकीकत में तीन आरोपियों को पकड़कर लंका थाने की पुलिस ने लॉकअप में बंद किया था।
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प्रार्थना पत्र में उत्तर प्रदेश सरकार, पुलिस आयुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त भेलूपुर, लंका थाने के एसएचओ और अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। इस मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही सीबी-सीआईडी जांच की भी मांग की गई है।