भाई को बचाने के उद्देश्य से भ्रामक और असत्य तथ्य पेश कर न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया
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संवाद न्यूज एजेंसी वाराणसी। चाकूबाजी के आरोपी को बचाने के लिए भेलूपुर पुलिस पर साजिश रचने, फर्जी बरामदगी दिखाने और अहम साक्ष्य छिपाने के लगाए गए आरोप अदालत की कसौटी पर टिक नहीं सके। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) मनीष कुमार की अदालत ने आरोपी पंकज मौर्या की बहन पूजा मौर्या की ओर से दायर प्रार्थना-पत्र खारिज कर कहा कि सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल साक्ष्य और विवेचना में पुलिस पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती। अदालत ने यह भी माना कि आवेदिका अपने भाई को बचाने के उद्देश्य से भ्रामक और असत्य तथ्य प्रस्तुत कर न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास कर रही थी।
भेलूपुर थाना क्षेत्र के बजरडीहा में सात जनवरी 2026 की रात चारपहिया वाहन खड़ा करने को लेकर राहुल कुमार उर्फ मटरू और पंकज मौर्या के बीच विवाद हो गया था। आरोप है कि कहासुनी के दौरान पंकज ने राहुल पर धारदार चाकू से हमला कर दिया, पुलिस ने घायल को बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया और आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया। बाद में पूजा मौर्या ने याचिका दाखिल कर पुलिस अधिकारियों पर विपक्षियों से मिलीभगत, थाने में मारपीट, फर्जी बरामदगी और काशी इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की सीसीटीवी फुटेज छिपाने का आरोप लगाया। उसका दावा था कि राहुल शराब के नशे में गिरकर घायल हुआ था। कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और विवेचना रिपोर्ट का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि घायल के शरीर पर 2.5 सेंटीमीटर का गहरा घाव धारदार हथियार के वार से हुआ था। साथ ही सीसीटीवी फुटेज से भी आवेदिका के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।