वाराणसी में पुत्री से दुष्कर्म के प्रयास और छेड़खानी के मामले में आरोपी पिता को कोर्ट से राहत मिल गई। विशेष न्यायाधीश द्वितीय (पॉक्सो एक्ट) अनुभव द्विवेदी की अदालत ने आरोप साबित नहीं होने पर पिता को दोषमुक्त कर दिया।
अदालत ने आदेश में कहा कि पीड़िता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य से अभियुक्त के विरुद्ध लगा लैंगिक हमले का आरोप किसी भी प्रकार से साबित नहीं होता है। अभियोजन साक्षीगण के साक्ष्य से भी कथित अपराध के आधारभूत तथ्य साबित नहीं होते हैं।
विचारण के दौरान अंकित साक्ष्य से ऐसे आधारभूत तथ्यों को अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर सका है, जिसके आधार पर अभियुक्त द्वारा लैंगिक हमला करने की उपधारणा की जा सके। जहां तक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के बयान के आधार पर विशेष लोक अभियोजन का तर्क है, न्यायालय उससे सहमत नहीं है।
उच्चतम न्यायालय ने जॉर्ज व अन्य बनाम स्टेट ऑफ केरला व अन्य के केस में यह कहा था कि धारा 164 के तहत अंकित बयान को मौलिक (स्वतंत्र अथवा सारगर्भित) साक्ष्य के रूप में नहीं माना जा सकता।