तंबाकू और बीड़ी-सिगरेट का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। इसके सेवन से जहां शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, वहीं फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे गले का कैंसर होने की संभावना अधिक रहती है। पिछले पांच साल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 20,346 लोगों की काउंसिलिंग की गई, जबकि 165 लोगों ने तंबाकू को छोड़ दिया है। 403 विद्यालयों को तंबाकू मुक्त परिसर भी घोषित किया गया है।
हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को धूम्रपान निषेध दिवस मनाया जाता है। इस बार नौ मार्च को यह दिवस मनाया जाएगा। इस साल की थीम ‘क्विट योर वे’ यानी ‘अपना रास्ता छोड़ो’ रखी गई है। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि धूम्रपान करने वालों को इस आदत से छुटकारा दिलाना दिवस को मनाने का उद्देश्य है। एसीएमओ डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि धूम्रपान या चबाने वाली तंबाकू सबसे बुरी आदतों में से एक है। इसे किसी के लिए भी अपनाना आसान है, लेकिन उतना ही ज्यादा स्वास्थ्य का जोखिम है। 12 से 17 वर्ष के युवाओं में धूम्रपान करने की आदतें बढ़ती जा रही हैं। इससे हृदय रोग, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, स्ट्रोक, मधुमेह और कैंसर जैसी कई समस्याएं पैदा होती हैं। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला परामर्शदाता डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि धूम्रपान करने वालों के फेफड़ों तक तो करीब 30 फीसद ही धुंआ पहुंचता है, बाकी बाहर निकलने वाला करीब 70 फीसद धुआं उन लोगों को प्रभावित करता है जो कि धूम्रपान करने वालों के आसपास रहते हैं। ऐसे में सभी को इससे बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है।