आलोक और अमित टाटा की तिकड़ी के सहारे चला तस्करी का खेल
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कफ सिरप तस्करी का सिंडिकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खड़ा करने में विकास सिंह नरवे का सबसे अहम हाथ रहा है। विकास ने ही पूर्वांचल के माफिया को साधा और उनसे शुभम को जोड़ने में भूमिका निभाई। इसका यह असर रहा कि 2022 से 2025 तक किसी भी माफिया ने शुभम जायसवाल की तरफ मुंह उठाकर नहीं देखा।
लखनऊ जेल में बंद अमित सिंह टाटा ने एसटीएफ की पूछताछ में यह बताया था कि शुभम से उसकी मुलाकात विकास सिंह नरवे ने ही कराई थी। इसके बाद एसटीएफ से बर्खास्त आलोक सिंह, अमित सिंह टाटा और विकास सिंह की तिकड़ी ने कफ सिरप की खेप बांग्लादेश तक पहुंचाने का काम किया।
आजमगढ़ के नरवे निवासी विकास सिंह को कफ सिरप का ऐसा चस्का लगा कि वह जौनपुर में ही अपना स्थायी ठिकाना बना लिया। कोतवाली पुलिस की पूछताछ में यह छनकर सामने आया कि पूरब से पश्चिम तक विकास सिंह ने ही कफ सिरप तस्करी की पूरी पटकथा लिखी है।
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शुभम के इनर सर्किल में शामिल विकास सिंह ने जौनपुर और आजमगढ़ में कई ड्रग लाइसेंस फर्जी नाम और पते पर भी बनवाए हैं। विकास सिंह नरवे, अमित टाटा, आलोक सिंह, आकाश पाठक समेत अन्य करीबी दुबई में कई बार जश्न मना चुके हैं। शुभम के साथ की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। 100 करोड़ से अधिक कफ सिरप से कमाई करने वाले विकास सिंह नरवे के पीछे अन्य एजेंसियां भी लगी हैं। विकास सिंह पर जौनपुर, आजमगढ़, वाराणसी में आपराधिक प्राथमिकी भी दर्ज है।