सप्तसागर मंडी में विकास सिंह नरवे की पहली मुलाकात शुभम जायसवाल से हुई। यहीं से दोनों आगे बढ़े और दोनों को जोड़ने में मुख्य भूमिका अमित सिंह टाटा और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह ने निभाई।
शुभम के कहने पर विकास ने बड़ागांव में देवनाथ फार्मेसी खोली। दूसरी तरफ रांची में शैली ट्रेडर्स से माल वाराणसी या प्रयागराज के लिए फर्जी बिल पर सप्लाई के लिए दिखाया गया जबकि माल को तस्करी कर बिहार बंगाल और त्रिपुरा के रास्ते सीधे बांग्लादेश में भेजा जाता रहा।
तस्करी से प्राप्त रकम को हवाला से वाराणसी लाकर यहां कफ सिरप की खरीदारी दिखाकर ब्लैक से व्हाइट किया जाता था। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि शुभम ने नजदीकी लोगों और रिश्तेदारों के नाम पर बने फर्मों में नकदी और आरटीजीएस से धन जमा कराया। वहीं, विकास नरवे ने अपनी फर्म से छह लाख न्यू फैंसिडल कफ सिरप का कारोबार किया, जिसे अवैध रूप से बाजार में खपाया गया।
नेपाल भागने की ये तीसरी कोशिश थी
पुलिस की जांच में सामने आया कि बांग्लादेश सीमा पर तीन तस्कर जो शुभम का काम देखते थे वह माल को बांग्लादेश भिजवाते और रकम नकदी में लेते थे। विकास और अंकित ने दोनों के फर्म से छह छह लाख शीशियों का कागजों पर कारोबार किया। विकास सिंह ने दो बार नेपाल भागने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
आईपीएल बेटिंग में साथियों के साथ लगाई मोटी रकम
करोड़ों की कमाई को आईपीएल सट्टेबाजी में लगाने का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क का अहम किरदार विकास नरवे रहा है, जो पहले भी इसी मामले में जेल जा चुका है। कफ सिरप मामले में बांग्लादेश से नकद में व्यापार होता था। हवाला के तहत पैसा कोलकाता, झारखंड और बिहार के रास्ते बनारस पहुंचता था।
दुबई में बैठे शुभम को कुर्की का नहीं डर
दुबई में रह रहा शुभम फिलहाल भारत लौटने से बच रहा है। जांच कर रही टीम के अनुसार वह जानता है कि पुलिस की गिरफ्त में आते ही पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं। शुभम करोड़ों रुपये की रकम को इधर-उधर खपाने में लगा हुआ है। वह विदेश में बैठकर अपने लोगों के साथ ये काम कर रहा है।