आरोपियों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि बताया कि डीएसए फार्मा खोजवा (भेलुपर) के माध्यम से हम लोगों की मुलाकात श्रीहरी फार्मा एंड सर्जिकल एजेंसी सोनिया (वाराणसी) के प्रोपराइटर अमित जायसवाल व शैली ट्रेडर्स के कंपीटेंट पर्सन शुभम जायसवाल से हुई थी।
उसी दौरान उनके द्वारा हम लोगों को कम समय में ज्यादा कमाई करने का लालच देकर कफ सिरप के व्यापार हेतु प्रेरित किया गया। उनके बनाए बिजनेस प्लान से हम लोग सहमत भी हो गए। उन लोगों के द्वारा एक-एक दुकान भी चिन्हित कराया गया। इसके बाद फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कराकर हम लोगों का ड्रग लाइसेंस बनवाया गया।
आरोपी ने बताया कि हम लोगों को शुभम जायसवाल के द्वारा देवेश जायसवाल के माध्यम से प्रतिमाह 30 से 40 हजार रुपये के बीच नगद कमीशन दिया जाता था। जिस फर्म का पैसा हम लोगों के अकाउंट में आता था, उसको जल्दी से जल्दी शैली ट्रेडर्स के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
हम लोगों के बैंक अकाउंट की पूरी जानकारी देवेश जायसवाल के पास थी। रुपया ट्रांसफर करने के समय देवेश जायसवाल हमसे ओटीपी भी मांगता था। हम लोगों के द्वारा एक वर्ष के अंदर करीब सात करोड़ रुपये का व्यापार किया गया है। हम लोगों की फर्म सिर्फ दिखाने के लिए थी, जबकि शैली ट्रेडर्स से जो भी माल हमारे फर्म के नाम पर आते थे, वह हमारे यहां न आकर दूसरी जगह भेज दिए जाते थे। इसके ई वे बिल और टैक्स इनवाइस हम लोग अपनी फर्म के माध्यम से तैयार करते थे।