डीएसए फार्मा के प्रोपराइटर दिवेश और उसके पड़ोसी महाकाल फार्मा के प्रोपराइटर अंकुश सिंह के खिलाफ भी कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज है। दिवेश और अंकुश साथ-साथ कफ सिरप के अवैध कारोबार में संलिप्त है। अंकुश उत्तराखंड के नैनीताल का है, यहां अपने जीजा के मकान में रहता है।
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बनवाया था ड्रग लाइसेंस, 40 हजार प्रति माह देता था
कफ सिरप की खरीद और बिक्री के मामले में कोलकाता से गिरफ्तार निशांत फार्मा के प्रोपराइटर प्रतीक मिश्रा और विश्वनाथ मेडिकल एजेंसी के प्रोपराइटर विशाल सोनकर को एसआईटी ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। एसआईटी की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि शुभम जायसवाल के भरोसेमंद खोजवा निवासी डीएसए फार्मा के प्रोपराइटर दिवेश जायसवाल ने ड्रग फर्म का पंजीकरण और बैंक खाता खुलवाया था। एवज में 30 से 40 हजार रुपये प्रति महीने देता था। फर्म से खरीद-बिक्री और रुपये के लेनदेन का पूरा ब्योरा दिवेश अपने पास ही रखता था। बाद में मालूम चला कि दोनों फर्म से 15 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2 की अदालत में कफ सिरप कांड में फर्म के दस कारोबारियों ने आत्मसमर्पण करने के लिए अपने अधिवक्ता के माध्यम से अर्जी दाखिल की है। इस अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई होनी थी लेकिन थाने से आख्या नहीं आने पर अब 10 दिसंबर की तिथि नियत की गई है। सोमवार को अदालत ने थाना कोतवाली से विस्तृत आख्या तलब की थी। अदालत में दस आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ता ने अर्जी दी है। अर्जी में कहा गया कि उक्त अपराध में कारोबारियों को फर्जी एवं मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर अभियुक्त बना दिया गया। पुलिस द्वारा तलाश की जा रही है। दबिश भी दी जा रही है।