बीएचयू में शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितताओं की पोल अब परत दर परत खुलनी शुरू हो गई है। कहीं जरूरी सर्टिफिकेट नहीं मिल रहे हैं तो कहीं नियमों की धज्जियां उड़ा दी गईं। विज्ञान संस्थान के एक विभाग में कम नंबर पाने वाले आवेदक को भी असिस्टेंट प्रोफेसर बना दिया गया है।
यहीं नहीं, कई आवेदकों के एपीआई नंबर में भी गड़बड़झाला है। इसका खुलासा विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से हो रहा है। नंबरों की सूची पर पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी समेत आठ शिक्षकों के हस्ताक्षर हैं।
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खुलासाः बीएचयू में नियम ताक पर रखकर कर दीं 100 से अधिक नियुक्तियां
प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर से प्रोफेसर के 215 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। आरटीआई के जवाब से पता चला है कि विश्वविद्यालय के भू-भौमिकी विभाग में ओबीसी संवर्ग के चार पदों पर नियुक्ति के लिए 37 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था।
10 सितंबर, 17 को प्रो. त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई चयन समिति के सामने 28 आवेदक उपस्थित हुए। चयन समिति ने जिन चार लोगों का चयन किया, उसमें एक पीएचडी डिग्रीधारी आवेदक को नंबर कम होने के बावजूद नियुक्ति के लिए अर्ह घोषित कर दिया।
इस पद के लिए एक ही नाम के दो आवेदक थे। जिनका चयन हुआ, उनके नंबर 54 थे, जबकि नियुक्ति से वंचित रह गए आवेदक को 65 नंबर मिले थे। सूत्रों की माने तो विज्ञान संस्थान में ही ऐसे 10 से अधिक मामले हैं।
इसके अलावा आवेदकों की एपीआई स्कोर में भी धांधली की गई है। एक ही आवेदक जिसने दो अलग-अलग पोस्ट के लिए आवेदन किया था, उनकी शैक्षिक योग्यता और रिसर्च परफार्मेंस भी एक ही हैं।
बावजूद इसके दोनों नियुक्तियों के लिए पाए गए नंबरों में बड़ा अंतर है। कहा जा रहा है कि अर्हताओं के कागजात एक ही होने के बाद भी अंतर किसी निहित स्वार्थ के लिए किया गया है।