अब यह कार्य धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या में शामिल होता जा रहा है। इस कार्य की जब सराहना होने लगी तो हौसला बढ़ने लगा। अब रात में बैठ कर मास्क बनाती हैं और दिन में जरूरतमंदों में इसे वितरित करती हैं। अब तक एक हजार से अधिक मास्क बनाकर अपने गांव सहित पास पड़ोस के गांवों के लोगों में वितरित कर चुकी हैं।
पिछले दिनों जिला पंचायत राज अधिकारी आरके भारती ने भी गांव पहुंच कर सुमन के बनाए फेस मास्क को लोगों में बांटते हुए प्रशंसा की थी। वर्तमान में आसपास के कुछ अन्य गांवों में भी महिलाएं व स्वयं सेवी संस्थाएं सुमन की राह पर चल कर मास्क बनाने में लगी हुई हैं। सुमन के अनुसार इसकी प्रेरणा उनके पति संतोष कुमार दुबे से मिली है।