लेकिन ज्ञात होने के एक वर्ष बाद भी क्षेत्र में मिले जीवाश्म की सुरक्षा न के बराबर है। आसपास के लोग जीविकोपार्जन के लिए उन पत्थरों को तोड़कर पुरानी धरोहरों को मिटाने में लगे हुए हैं। शासन प्रशासन की ओर से भी इसे संरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इन पहाड़ियों में उगते हुए सूरज, चांद, गाय के खुर के चित्र निशान आज भी हैं। जिन्हें लोग तोड़कर जमीन कब्जा करने में लगे हुए हैं। बुद्धजीवी लोगों ने मांग की है कि इसको उठाकर सुरक्षित संग्रहालय में रखवाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस पर अध्ययन कर सकें।