देखा जाए तो स्वास्थ्य कर्मियों के पास उचित सुरक्षा उपकराणों की काफी कमी है। यहां न किट है, न जांच की व्यवस्था। ये बिना हथियार के जंग लड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग यहां से सिर्फ संदिग्ध मरीजों की सैंपलिंग कर रहा है। इसे जांच के लिए वाराणसी या गोरखपुर भेज जाता है। बीच में चीन की किट आई थी, लेकिन उस पर बैन लगने के कारण उसे बंद कर दिया गया। जिले में 300 से अधिक थर्मल स्कैनर दिए गए हैं। जिससे मरीजों की जांच की जा रही है। देखा जाए तो कोरोना ड्यूटी में लगाए गए 150 से अधिक चिकित्सकीय स्टाफ के पास पीपीई किट भी जरूरत के हिसाब से नहीं है। इतना ही नहीं एन-95 मास्क भी सभी स्वास्थ्य कर्मियों को नहीं मिले हैं।
स्थानीय स्तर पर पूरे जनपद को कोविड-19 के लिए चार जोन में बांटा गया है। 15-15 लोगों की सात चिकित्सकीय टीम बनाई गई हैं। इसमें एक वरिष्ठ चिकित्सक, एक कनिष्ठ चिकित्सक दो लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, नर्स, दाई और सफाईकर्मी आदि शामिल हैं। वर्तमान में एक टीम को क्वारंटीन किया गया है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल में 22 बेड के दो कोराना वार्ड और एक आइसोलेशन सेंटर बनाया है।
इसी तरह मुहम्मदाबाद में 30 बेड का और सादात में भी 30 बेड का लेबल-1 अस्पताल बनाया गया है। मुहम्मदाबाद में ही एक और 30 बेड का कोविड लेवल वन सेंटर बनाया गया है। इसके अलावा जिले में 12 निजी अस्पतालों में भी कोराना वार्ड बने हैं। करीब 150 चिकित्सकों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। इतना ही नहीं जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एक-एक एंबुलेंस सुरक्षित किया गया है। जिला अस्पताल में पांच एंबुलेंस रखे गए हैं जो मरीजों या संदिग्धों को ले जाने और लाने का काम करती हैं। जिला मुख्यालय पर अलग-अलग क्षमता के करीब 15 क्वारंटाइन सेंटर हैं। इसी प्रकार जिले भर में ब्लॉक वार दो हजार की क्षमता के क्वारंटीन सेंटर तैयार किए गए हैं। इसमें स्कूल, कालेज, मैरिज हाल को शामिल किया गया है।
जिले में छह हॉट स्पॉट बनाए गए। शहर में तीन तथा दिलदारनगर में दो। इन्हें कई बार सैनिटाइज किया गया। नगर पालिका, नगर पंचायत ब्लॉक तथा ग्राम पंचायत स्तर पर भी सैनिटाइजेशन का काम हुआ है। प्रशासन का दावा है कि हॉट स्पॉट एरिया को करीब चार बार तथा अन्य पूरे जिले को कम से कम दो बार सैनिटइज किया जा चुका है।
भीड़ से दूर रहना सबसे बड़ी औषधिः सीएमओ
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. जीसी मौर्य ने कहा कि हम सभी का दायित्व है कि लॉकडाउन के दौरान घरों में रहें और सोशल व फिजिकल डिस्टेंस का पालन करते हुए सफाई पर ध्यान दें। जिला कोरोना प्रभारी डॉ उमेश कुमार का कहना है कि बाहर से लोगों के आने की सूचना पर गांव जाकर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग कराए। तभी हम और हमारा गांव बचेगा। ऐसे में खुद को सुरक्षित रखना भी चुनौती है।
टीम से जुड़े डा. प्रगति कुमार ने कहा कि सतर्कता के मद्देनजर मॉस्क का प्रयोग अवश्य करें। गांव-गांव भ्रमण कर यह बात लोगों को बताई जा रही है। कोरोना टीम के डॉ स्वत्रंतदेव सिंह ने कहा कि सावधानी बरतें मॉस्क व सैनिटाइजर के प्रयोग से ही इस महामारी से बचा जा सकता है। कहा सभी को आरोग्य सेतु एप्प को अवश्य डाउनलोड करना चाहिए। इससे कोरोना संक्रमित की सूचना मिलने के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिलती हैं।