लॉकडाउन के कारण सारे शैक्षणिक संस्थानों को बंद करना पड़ा, इससे शिक्षण-प्रक्रिया बाधित हुई। ज्ञान के निर्बाध प्रसार को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक समस्त शैक्षणिक संस्थानों को वैकल्पिक शैक्षणिक ऑनलाइन अधिगम अपनाना पड़ा है। इसमें डिजिटल लर्निंग, ई-लर्निंग ने अहम भूमिका निभाई।
मोबाइल से पढ़ाई कम, गेम खेलते रहे बच्चे
पढ़ाई बाधित न हो इसलिए घरों में ही ऑनलाइन पढ़ाई का काम शुरू किया गया, लेकिन यह कारगर नहीं हुआ। बच्चे पढ़ाई कम और मोबाइल में गेम खेलने को अधिक प्राथमिकता देते रहे। लंबे समय तक स्कूल बंद होने के चलते बच्चों को भौतिक पठन-पाठन से नहीं जोड़ा जा सक ा, जिसकी वजह से उनकी समझने और लिखने की क्षमता में कमी आई है।
सुविधाओं का भी अभाव
सुविधाओं के अभाव में कई बच्चे पढ़ाई से वंचित रह गए। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चों के पास स्मार्टफोन न होने से काफी दिक्कतें हुईं। कुछ परिवार तो ऐसे भी रहे, जिनके पास जो रोजगार था, वह भी छूट गया। घर का खर्च चलाने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई बड़ी चुनौती थी। कुछ घर तो ऐसे भी रहे, जहां केवल एक ही स्मार्ट फोन थे, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही थी।
निवेदिता शिक्षा सदन इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. आनंद प्रभा सिंह ने कहा कि कोरोना काल में विद्यालय बंद रहे, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई जारी रही। यह बात सही है कि ऑनलाइन कक्षा में उपस्थिति कम रही। कई घर ऐसे भी रहे, जहां स्मार्टफोन एक ही था। इस वजह से बच्चे नहीं जुड़ पाए। अभिभावकों के मोबाइल पर ऑनलाइन क्लास का वीडियो भी भेजा गया, ताकि छात्रों को परेशानी न हो। अब धीरे धीरे संख्या बढ़ रही है।
सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विश्वनाथ दूबे ने कहा कि दो साल में निश्चित ही पूरी पढ़ाई ऑनलाइन व्यवस्था पर निर्भर रही। ऐसे बच्चे जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं थे या फिर किसी कारण से वह ऑनलाइन नहीं जुड़ सके, उन्हें फोन कर विषयवार जानकारी दी गई। ऑफलाइन कक्षा का कोई विकल्प नहीं है, इससे बच्चों में सीखने और समझने की क्षमता का अधिक विकास होता है। अब व्यवस्था पटरी पर लौट रही है।