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वाराणसी में कोरोना: अब हर दिन मिले रहे संक्रमित, 14 नए मरीज मिलने के बाद एक्टिव केस हुए 58

Mon, 03 Jan 2022 01:23 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी में कोरोना के नए मामलों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। शनिवार को 21 संक्रमित मिलने के बाद रविवार को 14 कोरोना के नए मरीज मिले। अब वाराणसी में एक्टिव मरीजों की संख्या 58 पहुंच गई है।
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कोरोना जांच। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में रविवार को 14 कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसके साथ ही सक्रिय मरीजों की संख्या 58 हो गई है। रविवार को संक्रमित मरीजों में सबसे अधिक सात महिलाएं और चार छात्र शामिल हैं। इसके अलावा डॉक्टर, सरकारी कर्मचारी भी संक्रमित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी का सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए केजीएमयू भेजा गया है।

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रविवार को संक्रमित मरीजों में रथयात्रा निवासी 16 वर्षीय छात्र, सारनाथ में वल्लभ विहार कॉलोनी में 53 वर्षीय महिला, नगवा लंका में 28 वर्षीय चिकित्सक, बीएलडब्ल्यू निवासी 25 वर्षीय सरकारी कर्मचारी, डीआईजी आवास निवासी 59 वर्षीय पुरुष, नगवां लंका निवासी 50 वर्षीय महिला, कोरौत शिवपुर में 36 वर्षीय किसान की रिपोर्ट भी पॉजीटिव आई है।

इसके अलावा ट्रॉमा सेंटर बीएचयू 46 वर्षीय महिला, सिगरा नानक नगर कॉलोनी में 25 वर्षीय छात्रा, चेतनानगर लहरतारा में 27 वर्षीय युवती, 30 वर्षीय युवक, नाटी इमली का 22 वर्षीय छात्र, नीचीबाग निवासी 23 वर्षीय छात्रा और अस्सी घाट पर रहने वाले 30 वर्षीय युवक संक्रमित हुआ है। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि रविवार को संक्रमित मिले तीन मरीजों के मोबाइल नंबर पर संपर्क नहीं हो पाया है। रविवार को पहले से होम आईसोलेशन में रहने वाले दो लोगों को स्वस्थ घोषित किया गया है।

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31 दिसंबर तक मिले मरीजों में ओमिक्रॉन नहीं
वाराणसी में कोरोना संक्र मित सभी मरीजों का सैंपल जीनोम सीक्वेसिंग के लिए केजीएमयू लखनऊ भेजा गया है। शनिवार को 21 और रविवार को 14 मरीजों को छोड़कर बाकी सभी 25 मरीजों की जो रिपोर्ट आई है, उसमें डेल्टा प्लस वेरियंट ही मिला है। राहत की बात यह है कि अभी कोई भी ओमिक्रॉन वेरियंट वाला मरीज नहीं मिला है। सीएमओ के अनुसार केजीएमयू से जीनोम सैंपल की मौखिक रिपोर्ट दी जाती है।
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ओमिक्रॉन से ज्यादा खतरनाक डेल्टा: प्रो. चौबे
कोरोना मरीजों पर शोध करने वाले बीएचयू प्राणी विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे का कहना है कि वेरियंट चाहे कोई भी हो अगर लिखित रिपोर्ट मिले तभी उसके बारे में विस्तार से अध्ययन किया जाना ठीक होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि डेल्टा वेरियंट का जो नया रूप है, वह ओमिक्रॉन से भी अधिक खतरनाक है। ऐसे में इस पर अध्ययन होना भी जरूरी है। कई देशों में होने वाली मौतों में भी डेल्टा वेरियंट ही मिल रहा है।
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