कोरोना संक्रमण को देख लगातार दूसरे साल लोलार्क षष्ठी के स्नान पर्व पर संशय बना हुआ है। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को काशी में संतति कामना का पर्व सूर्य षष्ठी मनाई जाती है। भदैनी स्थित लोलार्क कुंड में स्नान-दान, विराजमान लोलार्केश्वर महादेव के दर्शन-पूजन व अनुष्ठान के विधान के कारण इसे लोलार्क षष्ठी भी कहा जाती है।
षष्ठी तिथि इस बार 12 सितंबर को मिल रही है। इस तिथि पर स्नान के लिए रेला उमड़ता है। पूर्व रात्रि से ही कतार लगती है और शाम तक विधान पूरे किए जाते हैं। कामना पूर्ति पर भी कुंड में स्नान व बच्चे का मुंडन के साथ ही लोलार्केश्वर महादेव को कड़ाही भी चढ़ाते हैं।
आषाढ़ से कार्तिक महीने के बीच काशी में पारंपरिक लक्खा मेलों का आयोजन होता है। रथयात्रा मेले से इसकी शुरुआत होती है। इसके बाद सोरहिया मेला, लोलार्क षष्ठी, नाटीइमली का भरत मिलाप, चेतगंज की नक्कटैया और तुलसी घाट की नागनथैया के साथ ही कार्तिक पूर्णिमा की देव दीपावली लक्खा मेले में शुमार होती है। काशी का लक्खा मेला काफी ज्यादा प्रसिद्ध है।