वाराणसी। कोरोना कॉल में मौत के बढ़ते ग्राफ को लेकर अब जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। इसको देखते हुए पहले से बीमार मरीजों के कोरोना संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों को दिया है। अस्पताल में भर्ती न होने वालों पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश जारी किया है।
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमित मिलने के बाद बहुत से लोग अस्पताल में भर्ती नहीं हो रहे हैं और तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल जाते हैं जहां उनकी मौत हो जा रही है। इसको देखते हुए बताया कि 60 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति यदि कोरोना पॉजिटिव
होगा या पहले से बीपी शुगर आदि बीमारियों से ग्रसित होगा,तो उनका अस्पताल में भर्ती करा कर उपचार कराया जाएगा। बताया कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद अगर कोई कोरोना के लक्षण नहीं मिलते हैं तो डॉक्टर की सलाह के बाद होम आइसोलेशन की अनुमति प्रदान की जाएगी। जिलाधिकारी ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा इसका उल्लंघन किया जाता है तो उनके विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। उन्होंने सीएमओ समेत अपर जिला मजिस्ट्रेट नगर,पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों को निर्देशित करते हुए इसका कड़ाई से पालन कराने को कहा है।
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को नोटिस
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने शिवपुर के कादीपुर निवासी कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत का संज्ञान लेते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिकरौल की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ उपमा पांडेय को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 2 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। जिलाधिकारी ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव मरीज परमात्मानंद पांडेय को 12 अक्टूबर को आरआरटी टीम द्वारा भर्ती होने के लिए कहा गया लेकिन मरीज और उनके परिजनों ने भर्ती होने से मना कर दिया गया। बताया कि नियमानुसार प्रभारी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी की ओर से इसके लिए एफ आई आर दर्ज कराना चाहिए था लेकिन उन्होंने अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरती। जिसके कारण 13 अक्टूबर को मरीज की तबीयत खराब होने पर 14 अक्टूबर को दीनदयाल अस्पताल में मौत हो गई। जिलाधिकारी ने नोटिस देकर पूछा है कि क्यो न लापरवाही के विरुद्ध कार्यवाही किया जाय।