आरोप है कि टुनटुन ने मुकदमा वापस लेने को देवकी को कई बार धमकाया था। उधर एक माह पहले टुनटुन मुंबई से घर आया था। शुक्रवार की रात 12 बजे के करीब वह अपने कुछ साथियों संग धारदार हथियार से लैस होकर शिवचंद 45 के घर पहुंचा और बाहर सो रहे शिवचंद 45 और उनकी पत्नी गीता 40 पर हमला कर उन्हे मौत के घाट उतार दिया।
चीख सुनकर बगल के कमरे में सो रहे ससुर देवकी और उसका पोता अजीत 15 साल और राज 13 साल जैसे बाहर निकले तो हमलावरों ने उन्हें भी हमला कर घायल कर दिया। चीख पुकार सुनकर ग्रामीण भी जुट गए। अन्य बदमाश तो फरार हो गए, लेकिन टुनटुन ग्रामीणों के हत्थे चढ गया। भीड़ ने उसे पीट-पीट कर मार डाला। सूचना पर डायल 100 थानाध्यक्ष रानीपुर मौके पर पहुंचे।
कुछ देर बाद ही एसपी अनुराग आर्य, एएसपी शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे। शव उठाने का ग्रामीणों ने विरोध किया। इसे लेकर जिला पंचायत सदस्य अशोक कुमार और पुलिस के बीच विवाद भी हुआ। एसपी ने आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वास दिया तब ग्रामीण शांत हुए और पुलिस शव उठा सकी।
दूसरी तरफ जिला अस्पताल के डाक्टरों ने घायल 70 वर्षीय देवकी और उसके पोते राज 15 को बीएचयू रेफर कर दिया। मृतक के बेटे अजीत की तहरीर पर पुलिस ने टुनटुन (मृतक) सहित चार नामजद और एक अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। तनाव देख वहां फोर्स तैनात की गई है। इस बाबत एसपी अनुराग आर्य का कहना है कि तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। घटना का कारण जमीनी विवाद सामने आया है।
क्या साथियों ने ही मार डाला टुनटुन को?
हमलारोपी टुनटुन के मारे जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। पुलिस की मानें तो भीड़ ने उसे मौत के घाट उतार दिया। जबकि गांव निवासी फूलमती ने बताया कि हमलावरों ने शिवचंद और गीता को मारने के बाद देवकी पर हमला किया। इस पर शिवचंद के बेटे ने टुनटुन को दबोच लिया। ऐसे में टुनटुन के साथियों ने समझा की अगर वह जिंदा रहा तो उनकी पहचान हो जाएगी। इस पर वापस लौट कर टुनटुन के साथियों ने ही उसे भी मौत की नींद सुला दिया।