सफाई कर्मी घूरेलाल की मौत के बाद पत्नी चंदा बेसुध है। वह बार बार रोते हुए कह रही है कि अब चार बच्चों को कैसे पालेगी। परिवार में दो बेटी और दो बेटे हैं। बड़ी बेटी रुबी 14 साल की है। कक्षा नौ में पढ़ती है। बेटा चंद्रशेखर 12 साल का है और वह कक्षा आठ में पढ़ता है। 11 साल की बेटी शिवानी है। सबसे छोटा बेटा अजय दस साल का है। वह मछोदरी स्मार्ट स्कूल में कक्षा सात में पढ़ता है।
जांच का मुख्य बिंदु जिम्मेदार कौन
जिलाधिकारी एस राजलिंगम की ओर से गठित जांच कमेटी के डिप्टी कलेक्टर माल पिनाक पाणि द्विवेदी ने कहा कि परिवार वालों से मुलाकात के अलावा घटना स्थल का मुआयना किया गया। जांच का मुख्य बिंदु घटना के लिए जिम्मेदार कौन है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। परिवार वालों को हर संभव मदद दिलाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के अनुसार 30 लाख रुपये देने का प्राविधान है। परिवार वालों को एक लाख रुपये नकद और दस लाख रुपये का चेक ठेकेदार से दिलवाया गया है। बाकी बची 19 लाख रुपये की धनराशि भी दिलाई जाएगी।
सीवर कार्य करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि दो वक्त रोटी की जुगाड़ में मौत के मुंह में जाना पड़ता है। विभागीय अधिकारियों को इनके जान की परवाह नहीं होती है। न तो इन्हें कोई सुरक्षा उपकरण दिया जाता है और न ही इनका बीमा कराया जाता है। ठेकेदार शराब पिलाकर सीवर चैंबर में उतार देते हैं।
बीते 10 सालों में आठ की मौत, केवल एक को मिला दस लाख मुआवजा
बीते दस सालों में आठ लोगों की मौत सीवर सफाई के दौरान हुई है। बीते 30 नवंबर 2021 को लहुराबीर के पास मैनहोल में उतरे एक सफाईकर्मी की मौत हुई। पांडेयपुर काली मंदिर के पास एक मार्च 2019 को दो सफाईकर्मियों की जान चली गई थी। नवंबर 2018 में चौकाघाट के पास हुई घटना में दो सफाईकर्मी की मौत हुई थी। इसके अलावा चौहटटा लाल खां के पास एक सफाईकर्मी की मौत हुई। सुंदरपुर और पीलीकोठी के पास एक-एक सफाईकर्मी की मौत हो चुकी है। इसमें से केवल एक को दस लाख रुपये मुआवजा मिला है। बाकी लोगों को कुछ रुपये देकर मामला दबा दिया गया।