निकाय चुनाव में परिवारवाद कार्यकर्ताओं पर भारी पड़ा। पहले कांग्रेस और अब भाजपा ने मेयर पद पर परिवारों को प्राथमिकता में रखते हुए उनमें ही विश्वास जताया है।
कांग्रेस ने जहां पूर्व सांसद व राज्यसभा के पूर्व उपसभापति श्यामलाल यादव की की बहू को टिकट दिया है तो भाजपा ने भी पूर्व सांसद शंकर जायसवाल की बहू को ही प्रत्याशी बना दिया है।
वाराणसी के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व सांसद यादव की पुत्रवधू शालिनी यादव को मेयर पद का उम्मीदवार जातीय गणित को देखते हुए किया है। तकरीबन 80 हजार यादव मतदाता हैं।
पुराने कांग्रेसी नेता पार्टी के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। शालिनी यादव के नाम पर वरिष्ठ नेताओं में भी असहमति नहीं थी लेकिन कार्यकर्ता अपने ऊपर विश्वास नहीं जताने से रुष्ट हैं।
उधर, खुद को परिवारवाद से दूर बताने वाली भाजपा ने भी पूर्व सांसद जायसवाल की पुत्रवधू मृदुला जायसवाल को प्रत्याशी घोषित किया है। राम मंदिर आंदोलन के समय से सक्रियता, संघ से परिवार की नजदीकियों और नोटबंदी के बाद से नाराज व्यापारी वर्ग को खुश करने के लिए भाजपा ने यह दांव लगाया है।
पार्टी मानती है कि व्यापारी वर्ग को टिकट देने से पार्टी को अपना पारंपिरक वोट तो मिलेगा, जायसवालों के अलावा व्यापारियों का भी वोट मिलेगा। वैसे, यह मानने वालों की भी कमी नहीं है कि दोनों पार्टियों ने पार्टी के पुराने वफादार नेताओं के परिवार के सदस्यों को टिकट किसी नए नेता को टिकट देने से उत्पन्न विवाद को टालने की गरज से ही दिया है।
यही नहीं, पार्टियों को पूर्व में यह उम्मीद नहीं थी कि यहां का मेयर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो जाएगा। सवर्ण तबके के बडे़ नेताओं ने पहले से या तो खुद या फिर अपने परिवार के किसी सदस्य को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रखी थी।