अखिल भारतीय व्यास संघ के राष्ट्रीय अधिवेशन में रविवार को देश भर के कथावाचकों, धर्माचार्यों और संतों ने हिस्सा लिया। इसमें तय किया गया कि सनातन धर्म के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों से सख्ती से निपटा जाएगा। पथराव की घटनाओं से निपटने के लिए एक लाख धर्मयोद्धा तैयार किए जाएंगे। अगर सरकार ने पथराव की घटनाओं पर रोक नहीं लगाई तो सड़क पर उतरा जाएगा। धर्माचार्यों ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान पर निंदा प्रस्ताव पारित किया, जिसमें मठाधीश को माफिया कहा गया था।
सिद्धपीठ पातालपुरी मठ नरहरपुरा में रविवार को व्यास संघ का अधिवेशन हुआ। इसमें हिंदुओं के खिलाफ अघोषित लड़ाई (पथराव, थूक मसाज, यूरिन जूस, धर्म परिवर्तन के लिए शादी) पर चिंता जताई गई। अध्यक्षता कर रहे महंत बालक दास महाराज ने कहा कि हम शांति चाहते हैं, लेकिन धर्म के अपमान और हिंदुओं की बर्बादी की कीमत पर नहीं।
सनातन धर्म को लक्ष्य करके कोई मठाधीश को माफिया बता रहा तो कोई देवी-देवताओं का अपमान कर रहा है। कोई वक्फ बोर्ड के नाम पर मंदिरों को हड़पने की साजिश रच रहा है। मस्जिदों से पत्थर फेंककर हमें डराया जा रहा है। सरकार बताए कि हमें कब तक चुप रहना है? जल्द ही संत समाज कोई बड़ा निर्णय लेने के लिए बाध्य होगा। हम अपने आराध्य और अपनी संस्कृति को अपमानित होते हुए नहीं देख सकते हैं।
राष्ट्रीय अधिवेशन में वक्ताओं ने पूछा कि जब हिंदू उनके जुलूसों पर पथराव नहीं करते तो वे लोग हिंदुओं के धार्मिक यात्राओं पर पथराव कर किसको चुनौती दे रहे हैं? सरकार समय रहते इसको तत्काल बंद कराए अन्यथा देशभर से संतों के नेतृत्व में लाखों लोग सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे। अधिवेशन में महंत श्रवण दास, महंत राघव दास, पं. दिनेश त्रिपाठी, पं. शिवानंद मिश्र, पं.अच्युदानंद पाठक, पं.गंगासागर पांडेय,पं. सुरेश मिश्र, पं. राघवेंद्र पांडेय समेत देश भर के संत महंत, कथवाचक और धर्माचार्य मौजूद रहे।
ये प्रस्ताव पारित
- जिस मस्जिद या घर से हिन्दुओं की धार्मिक यात्राओं पर पत्थर फेंके गए, उस पर तत्काल बुलडोजर चलाया जाए।
- मठाधीश को खुलेआम माफिया कहने वाले के खिलाफ सरकार कार्रवाई करे।
- वक्फ बोर्ड द्वारा हड़पी गई जमीन मुक्त कराई जाए।
- धर्मांतरण कराने वालों की संपत्ति जब्त की जाए।
- मंदिरों में स्थानीय धर्माचार्यों, पीठाधीश्वरों को संचालन समिति में रखा जाए।
- हिंदू धर्मस्थलों में पवित्रता का सिद्धांत लागू किया जाए। मांसाहारी को मंदिर परिसर में किसी कीमत पर न जाने दिया जाए।
- हिंदू देवी देवताओं पर टिप्पणी करने और किसी तरह की फिल्म बनाने पर प्रतिबंध लगाया जाए । सनातन धर्म का मजाक उड़ाने वालों के विरुद्ध कड़े कानून बनाए जाएं।
- व्यास संघ के सदस्य दलित बस्तियों के उद्धार के लिए रामकथा का आयोजन करेंगे और दलित समाज के उत्थान हेतु कार्य करेंगे ।
- सनातन के विरोधियों का खुलकर विरोध किया जाएगा और लाखों हिंदुओं को जागरूक किया जाएगा।
- सनातन धर्म और संस्कृति के अपमान करने वालों को बहिष्कार किया जाएगा ।
- बांग्लादेशी हिंदुओं की जान और सम्मान की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ को पत्र लिखेंगे।
- सरकार वेदपाठी बटुकों के लिए छात्रवृत्ति योजना शुरू करे ताकि वेद को घर घर तक पहुंचाया जा सके।
- हिंदू मंदिरों को वापस न देना पड़े, इसके लिए वर्शिप एक्ट बनाया गया है। इसको पूरी तरह खत्म किया जाए।
- व्यासपीठ पर बैठकर जो मर्यादा तार-तार करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- जिन मंदिरों को आक्रांताओं ने तोड़ा है, उसकी फिर से प्राण प्रतिष्ठा कराई जाए ।
- सांस्कृतिक पहचान को पुनः कायम करने की दिशा में व्यास संघ लोगों को जागरूक करेगा।