चारों तरफ घना कोहरा। कोहरे को चीर कर गिरती बर्फीली फुहार की हड्डियों तक मार। सर्द रात प्लेटफार्म, रोडवेज और फुटपाथों ही नहीं घर में किवाड़ बंद कर दुबके लोगों की भी रात रबर की तरह खिंचती चली गई।
ऐसी लंबी रात की सुबह भी ओदी ही हुई। सूरज दस बजे तक लिहाफ से निकला ही नहीं। सच में रविवार की रात इतनी सर्द थी ही कि पारे के गिरने का सौ साल का कीर्तिमान ही ध्वस्त हो गया।
न्यूनतम तापमान में एकबारगी चार डिग्री सेल्सियस से ज्यादा की गिरावट आई, जिसके चलते सुबह तो हड्डियां कांपती ही रहीं। दोपहर में सूरज निकलने के बावजूद कंपकंपी छूटती रही।
रविवार आधी रात के बाद ही पाला पड़ने लगा था। सोमवार को सुबह दिन चढ़ने तक सूरज नहीं निकला। जैसे-जैसे रात ढली कोहरे से तुहिन कण बरसने लगे, जिससे सर्दी का एहसास और गहरा हो गया।
बीएचयू में न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री और बाबतपुर मौसम केंद्र ने 4.2 डिग्री दर्ज किया गया। सामान्य स्तर पर तापमान में सात डिग्री की गिरावट से कंफर्ट लेवल बहुत कम हो गया था। दिन में सूरज निकलने के बावजूद अधिकतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं गया।
बीएचयू के मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि इससे कुछ वर्ष पहले दिसंबर में सर्वाधिक न्यूनतम स्तर पर तापमान 4.7 डिग्री तक रिकार्ड किया गया था। पूर्वांचल से कोल्ड फ्रंट गुजरने से अभी मौसम में इसी तरह गलन बनी रहेगी। करीब सौ साल में दिसंबर में इतना काम तापमान यहां कभी नहीं रहा है।
इस कड़ाके की सर्दी में प्रशासन ने अलाव नहीं जलवाए हैं। कोहरे के चलते चांदपुर इलाके में एक ट्रक लड़ गया। सोमवार की रात दृश्यता शून्य हो जाने के कारण जेट एयरवेज की कोलकाता उड़ान निरस्त करनी पड़ी। कड़ाके की ठंड के कारण प्रशासन ने 28 दिसंबर तक स्कूल-कालेजों की छुट्टी घोषित कर दी, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली।