नवजात के शरीर का ज्यादा ठंडा होना
बीएचयू बाल रोग विभाग के प्रो. सुनील कुमार राव का कहना है कि ठंड में बच्चों की सेहत पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। इसमें भी तीन माह तक के नवजात पर ठंड का प्रभाव अधिक रहता है। नवजात का शरीर ठंडा पड़ने से हाइपोथर्मिया की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में अभिभावकों को विशेष ध्यान देते रहना चाहिए। 10 साल तक के बच्चों में सांस फूलने, बुखार की समस्या देखने को मिल रही है। ओपीडी में भी जागरूक किया जा रहा है।
हृदयरोगियों के लिए सतर्कता वाला मौसम
ठंड आते ही हृदय रोगियों को ज्यादा सतर्कता बरतनी होती है। बीएचयू हृदय रोग विभाग के प्रो.ओमशंकर का कहना है कि ठंड बढ़ने के साथ ही ब्लडप्रेशर बढ़ने लगता है। अगर कोई पहले से हृदयरोगी है तो उसकी दवा की मात्रा भी बढ़ जाती है। बीपी, शुगर है तब भी सेहत के प्रति लापरवाही से हार्ट अटैक की संभावना भी ज्यादा बढ़ती है। उन लोगों में ज्यादा घातक होता है, जो भोर में टहलने निकलते हैं। इसी समय ठंड अधिक लगती है और हार्ट अटैक का खतरा रहता है। एकदम सुबह ठंड में नहाने से बचना चाहिए।
ठंड में होने वाली सवास्थ्य समस्याओं को लेकर अस्पतालों में हेल्पडेस्क बनाया गया है। यहां सर्दी, बुखार वाले मरीजों की अलग से सूची बनाई जा रही है। हृदय रोगियों की बढ़ती समस्या को देखते हुए सभी जगहों पर थंब्रोलाइसिस की व्यवस्था भी है। - डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ