मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले आंगनबाड़ी केंद्रों में न पेयजल की व्यवस्था थी, न शौचालय और न गर्म भोजन की। गलती लखनऊ में बैठे लोग करते थे और गाली आंगनबाड़ी की बहनों को खानी पड़ती थी। 2017 में सरकार बनने के बाद जब उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति की समीक्षा की तो पूरा तंत्र बदहाल मिला। पोषाहार की गुणवत्ता पर सवाल थे। वितरण की कोई नियमित व्यवस्था नहीं थी। इसके बाद व्यवस्था में बदलाव शुरू किया गया। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया है।
मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण और नवीनीकरण पर 30 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। चहारदीवारी, शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। काशी मां अन्नपूर्णा की भी धरती है जहां खुद बाबा विश्वनाथ उसने भिक्षा ले रहे हैं।
इस विभाग की मंत्री का नाम भी अन्नपूर्णा देवी है तो अभियान को तो सफल होना ही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से काशी ने अपनी पुरातन पहचान को सुरक्षित रखते हुए नया कलेवर पाया है जो नई आभा के साथ दुनिया को आकर्षित कर रही है। इसी तरह गांव और गलियों से पोषण, शिक्षा और कौशल की मजबूत नींव रखकर आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण होगा।
1.60 करोड़ बच्चों को सुविधाएं, 75 से 80 प्रतिशत बेटियां बिना जूते और चप्पल के विद्यालय जाती थीं
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले 75 से 80 प्रतिशत बेटियां बिना जूते और चप्पल के विद्यालय जाती थीं। आज 1.60 करोड़ बच्चों को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर दिए जा रहे हैं। ऑपरेशन कायाकल्प से 1.36 लाख विद्यालयों को बेहतर बनाया गया है। बालवाटिका के बच्चों को भी दो यूनिफॉर्म देने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से करीब 2100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार किया गया है। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर और अटल टिंकरिंग लैब जैसी सुविधाएं बढ़ी हैं।
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