मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय नहीं थे, वहां के लिए बजट का प्रावधान किया गया। बेसिक शिक्षा में दाखिला लेने पर बच्चे-बच्चियों को 15 अप्रैल को पहले और 15 जुलाई को दूसरे चरण में निःशुल्क ड्रेस, कॉपी-किताब दी जा रही है। बच्चों के बैंक अकाउंट में ही रुपये ट्रांसफर किए जा रहे हैं। प्रदेश में 25 लाख बच्चियों को सुमंगला योजना का लाभ दिया गया है।
जब बच्चे निरक्षर होंगे, तो समाज निर्धन और प्रदेश बीमारु होगा: मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की अलख घर-घर तक पहुंचाने के लिए 1 से 15 अप्रैल तक स्कूल चलो अभियान की शुरुआत की गई है।
जब बच्चा साक्षर होता है, तो समाज का विकास होता है, प्रदेश समृद्ध होता है, लेकिन जब बच्चे निरक्षर होंगे, तो समाज निर्धन और प्रदेश बीमारु होगा। प्रत्येक विद्यालय में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट और पेयजल की समुचित व्यवस्था है। विद्यालयों की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है।
सीएम ने इन बच्चों को दिए प्रमाण पत्र
मुख्यमंत्री ने कक्षा 1 के छात्र विकास, आंशिक गुप्ता, कक्षा 2 की श्रेया सोनकर, कक्षा 3 की कजरी, कक्षा 4 की दीपशिखा, कक्षा 5 की रोली सोनकर, कक्षा 6 की श्रेया यादव, कली केसरी और कक्षा 7 की रुचि यादव व सांची गुप्ता को पाठ्य पुस्तकें दीं। निपुण बच्चे अभय पटेल, जान्हवी, श्रेयांश, नैन्सी, सरस्वती को प्रमाण पत्र दिया।
बच्चों के भविष्य को संवारने का अभियान है स्कूल चलो अभियान : संदीप सिंह
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि विद्या धन बांटने से बढ़ता है। स्कूल चलो अभियान मात्र एक अभियान नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने वाला अभियान है। पिछले 9 साल में परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदली है। 19 पैरामीटर में 97 फीसदी की उपलब्धि हासिल की गई जिससे बच्चों के साथ ही उनके अभिभावकों का विश्वास परिषदीय विद्यालयों के प्रति बढ़ा है। इससे ड्रॉप आउट रेट घटा है। मंत्री ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों के बच्चे निपुण होते जा रहे हैं।
746 कस्तूरबा विद्यालय प्रदेश में संचालित हैं। पूर्व में यह कक्षा 8 तक संचालित होते रहे हैं। सरकार ने इसे इंटर तक संचालित करने का निर्णय लिया है। इस अभियान को गंभीरता से लें और हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि उनके ही नहीं बल्कि उनके आसपास के जो बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, उनका दाखिला पास के प्राथमिक विद्यालय में अवश्य कराएं।