मुख्यमंत्री ने वर्ष 1916 में महात्मा गांधी की काशी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय बापू ने काशी विश्वनाथ में व्याप्त गंदगी और अव्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा था कि यहां कैसे हिंदू रहते हैं। महात्मा गांधी के नाम पर सत्ता हासिल करने वालों की लंबी सूची है, मगर उनके विजन पर चलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही भव्य काशी विश्वनाथ धाम का सपना साकार किया।
उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ की तरह मां विंध्यवासिनी का भी भव्य मंदिर निर्माण कराया जा रहा है। अयोध्या और ब्रज में भी काशी के विजन को लागू किया जा रहा है। इस दौरान कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी, रविंद्र जायसवाल, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, महेश श्रीवास्तव, विद्यासागर राय, नवरतन राठी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने योजनाओं के जरिए रोजगार के अवसर सृजित किए। अयोध्या की दीपावली का जिक्र किया और कहा कि सात लाख मिट्टी के दीपक तैयार हो चुके हैं। इससे प्रजापति और कुम्हार समाज के लोगों को अवसर मिला है।
मुख्यमंत्री ने कोरोना की लंबी लड़ाई के बीच शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहे असर पर चिंता जाहिर की और कहा, काशी की परंपरा गुरु शिष्य की थी। ऐसे में कोरोना महामारी में इस गुरु शिष्य के संवाद को बनाए रखने के लिए रास्ता निकालना होगा। दूर गांव में बैठे उन सभी बच्चों को शिक्षा के साथ जोड़ सकते हैं और इस चुनौती के बीच रास्ता निकालना होगा।
इस बात पर विचार करने का समय है कि तकनीक का बेहतर उपयोग कैसे कर सकते हैं। लंबे समय तक स्कूल बंद नहीं हो सकते हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के एक बच्चे के संवाद को साझा किया और कहा कि एक बच्चे से पूछा कि कौन सी क्लास में हो, उसका जवाब था कि जब मैं स्कूल जाता था तो चौथी में था। बच्चों का संवाद स्कूल से टूट गया है। यह भाव है कि उन बच्चों का जिनके मन में पढ़ने की तमन्ना है। नए प्रयास को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।