इसके बाद कैदी भड़क गए और उन्होंने योजना बनाकर मंगलवार को दोपहर में अचानक हंगामा शुरू कर दिया। जब तक जेलकर्मी कुछ समझते उन्होंने जेल में तोड़फोड़ शुरू कर दी और सीसीटीवी कैमरे आदि तोड़ दिए। बंदी रक्षकों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो कैदी ईंट-पत्थर चलाने लगे, जिससे डिप्टी जेलर डॉ. विनय दुबे व जेल चिकित्सक डॉ. देवेश कुमार चोटिल हो गए।
इस दौरान कैदियों ने जेल अस्पताल और बैरको में शीशे व खिड़कियां आदि तोड़ दीं। कैदियों का बवाल बढ़ता देख जेल प्रशासन की ओर से इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी गई। सूचना पर कई थानों की फोर्स के साथ सीओ सिटी अरुण कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक संजय कुमार के साथ सिटी मजिस्ट्रेट जेल पहुंचे। बाहर से पहुंची फोर्स और बंदी रक्षकों ने एक साथ बल प्रयोग कर कैदियों पर काबू पाया और उन्हें बैरकों में पहुंचाया।
इसके बाद कैदी जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। जेल में बवाल की सूचना पर पहुंचे जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही व पुलिस अधीक्षक देवेंद्रनाथ कैदियों से बात की। जेल सूत्रों की मानें तो कैदियों ने अधिकारी द्वय के सामने कई आरोप लगाए। उनका कहना था कि जेल में ठीक से भोजन नहीं दिया जा रहा है। यहां की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है।
उनका आरोप था कि लॉकडाउन में घर बात करने पर चार्ज बढ़ा दिया गया है। इस समय हर कार्य के लिए डबल पैसे लिए जा रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जेल अधीक्षक से बात की और उन्हें कैदियों की व्यवस्था के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। हालांकि जेल से बाहर निकले जिलाधिकारी ने कहा कि कैदियों ने जेल प्रशासन द्वारा मोबाइल आदि जब्त करने के विरोध में ही बवाल किया था। उन्हें काबू कर लिया गया है और संबंधित कैदियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए जेल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं।