कचरा प्रबंधन न होने से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार की कोशिशें परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। अरसे से शहर के लिए चुनौती बने कचरा प्रबंधन की अब तक कोई राह नहीं निकल पाई है।
रमना में जैसे-तैसे कूड़ा डंप कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है जबकि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने यहां बड़ा गड्ढा खोदने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कूड़ा निस्तारित करने के निर्देश दिए थे। इसकी जिम्मेदारी सीएंडडीएस और नगर निगम को दी थी। अब तक यह काम पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन यहां बेपरवाही का आलम ऐसा कि अभी इसकी शुरुआत ही नहीं हो पाई है।
करसड़ा प्लांट का मामला अधर में लटके होने से नगर निगम के लिए कूड़ा निस्तारण की चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। फिलहाल रमना को छोड़कर कोई और डंपिंग ग्राउंड उपलब्ध नहीं है। करसड़ा प्लांट के चालू न होने से शहर में रोजाना करीब 200 मीट्रिक टन कचरे का बैकलाग बना रहता है।
28 नवंबर को केंद्रीय योजनाओं का हाल जानने आए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रवीण प्रकाश ने सीएंडडीएस और नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि एटूजेड के बचे 10 करोड़ रुपये से कचरा प्रबंधन का एक साल का प्लान बनाएं। इसके तहत रमना में गड्ढा खोदकर उसमें कूड़ा निस्तारित करने और भरने के बाद उस पर मिट्टी डालकर पाटने का निर्देश दिया था। बता दें कि, करसड़ा प्लांट के संचालन के एटूजेड को दस करोड़ रुपये दिए जाने थे। यह धनराशि अभी बची है।
इसके बाद दस दिसंबर को संयुक्त सचिव प्रवीण प्रकाश दोबारा आए और इस बारे में प्रगति पूछी तो पता चला कि अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है। इस पर उन्होंने नगर निगम और सीएंडडीएस को कड़ी फटकार लगाई। हिदायत दी कि जल्द से जल्द काम शुरू कराएं और उसकी पूरी रिपोर्ट मंत्रालय को मुहैया कराएं। यह भी कहा कि शहर में कचरा प्रबंधन के कार्यों की मानीटरिंग खुद मंत्रालय करेगा लेकिन इतना सबके बाद भी अब तक गड्ढा खोदने की शुरुआत भी नहीं हो पाई है।