करीब एक पखवारे छाया रहा चोटीकटवा का खौफ अब खत्म हो गया है। फिर भी चोटीकटवा की शिकार हुई महिलाओं और युवतियों के अलावा उनके परिवारीजन अभी भी यह जानना चाहते हैं कि कोई कीड़ा चोटी काट रहा था अथवा कुछ और।
चोटी कटने के ज्यादातर मामले ग्रामीण क्षेत्र में हुए हैं और जिनके साथ ऐसी घटनाएं होने की बात कही गई, उनकी शिक्षा का स्तर सामान्य है। यही नहीं, ज्यादातर महिलाओं और युवतियों के साथ ये घटनाएं तब हुईं, जब वे शौच के लिए बाहर जा रही थीं।
इसके चलते यह भी अफवाह उड़ाई गई कि यह सब सरकार की करामात है, ताकि लोग अपने घर में शौचालय बनवाएं। आराजी लाइन क्षेत्र के शाहंशाह पुर गांव की कलावती (35) चोटी कटने की घटना के बाद बीमार हो गई थीं। अब उनकी हालत सामान्य है।
कहती हैं कि घटना के बाद मन में खौफ बैठ गया था। रोहनिया के अखरी गांव निवासी संजू देवी और ब्यूटी पार्लर चलाने वाली सुमन की मानें तो उनकी चोटी सोते समय कट गई थी। दोनों कुछ दिन परेशान रहीं पर अब सामान्य हो गई हैं।