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शिक्षा ही है संस्कार और ऊर्जा की जननी

Sat, 15 Oct 2016 02:09 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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चिंतामणि महोत्सव में बोलते पूर्व सांसद विजय सोनकर शास्‍त्री।
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शिक्षा से ही जीवन में संस्कार आते हैं। संस्कार ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाती है। इसलिए जीवन में शिक्षा का महत्व सबसे अधिक है। शिक्षा से ही मनुष्य के जीवन में ऊर्जा आती है। उक्त उद्गार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे ने शुक्रवार को चिंतामणि महोत्सव में आयोजित समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही राष्ट्र को सशक्त बनाया जा सकता है। जब तक हर नागरिक शिक्षित नहीं होगा, समाज में कुरीतियां और विसंगतियां रहेंगी। ऐसे समय में संस्कारयुक्त शिक्षा की जरूरत है।
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कुलपति ने काशी में शिक्षा के उन्नयन और प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान करने वाले चिंतामणि मुखर्जी की तुलना स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों से की। कहा कि उनकी मेहनत और दूरदर्शी सोच का नतीजा है कि आज सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कालेज से हर साल सैकड़ों प्रतिभावन छात्र निकल रहे हैं। विशिष्ट अतिथि पूर्वद्य सांसद डॉ. विजय सोनकर शास्त्री ने कहा कि आधुनिक युग में शिक्षा और संस्कृति दोनों में गिरावट आना चिंता का विषय है। बालमन को राजनीति से दूर रखना चाहिए। कहा कि प्राथमिक शिक्षा में समावेशी विकास के लिए धार्मिक शिक्षा एक हद से जायज है।

आज ऐसी शिक्षा की जरूरत है जो युवा पीढ़ी में नैतिकता और राष्ट्र के प्रति भक्ति का भाव जागृत करे। समारोह में महापौर रामगोपाल मोहले, डॉ. पीके मुखर्जी, सपा नेता रीबू श्रीवास्तव, संयुक्त शिक्षा निदेशक ओंकार शुक्ल, डीआईओएस विजय शंकर मिश्र आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर कक्षा 12 के छात्र संदीप भारती द्वारा बनाई गई चित्र विथिका का अतिथियों ने अवलोकन किया। कार्यक्रम का आगाज पंडित सुनील प्रसन्ना के शहनाई वादन से हुआ। कक्षा 10 के छात्र अमरनाथ झा ने शिव वंदना प्रस्तुत किया। विद्यालय के पूर्व छात्र प्रणव लाहा ने गायन, सुधीर ने बांसुरी, विशाल गुप्ता ने तबला व आनंद वर्मा ने चित्रकारी से शाबाशी बटोरी।
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