यूपी और बिहार में पीएनईएस के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसके कारण, बचाव और उपचार की नई रणनीति तैयार की जा रही है। आगामी 7-8 मार्च को केरल, दिल्ली, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न संस्थानों से मनोचिकित्सक, न्यूरोलॉजिस्ट और मनोवैज्ञानिक आईएमएस-बीएचयू में जुटेंगे। इसमें बीमारी के कारण, पहचान और उपचार की तकनीकों पर चर्चा होगी। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों में बढ़ते मामलों पर मंथन किया जाएगा।
साइकोजेनिक सिंड्रोम में दिखते हैं ये लक्षण
- मिर्गी के मरीजों की तरह शरीर में कंपन या ऐंठन
- कुछ समय के लिए बेहोशी जैसा महसूस होना
- सामान्य स्थिति में हाथ-पैर पटकना
- देखने में मरीज बेहोश लगे, लेकिन पूरी तरह अचेत न हो
साइकोजेनिक सिंड्रोम (पीएनईएस) का उपचार मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक थेरेपी के माध्यम से किया जाता है। प्रो. विजयनाथ मिश्रा के अनुसार बिहेवियर थेरेपी और कॉग्निटिव थेरेपी काफी प्रभावी हैं। मरीजों की साइकोलॉजिकल काउंसिलिंग भी की जाती है। इसमें मनोचिकित्सा, मनोविज्ञान और न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों की टीम शामिल रहती है।
केस-1
जौनपुर निवासी 24 वर्षीय युवती को शादी के डेढ़ महीने बाद मिर्गी जैसा झटका आने लगा। परिजनों ने पहले इसे मिर्गी मानकर उपचार कराया, लेकिन जब राहत नहीं मिली तो वे बीएचयू के न्यूरोलॉजी ओपीडी पहुंचे। जांच में पता चला कि यह पीएनईएस (साइकोजेनिक नॉन-एपिलेप्टिक सिंड्रोम) के लक्षण हैं। युवती ने बताया कि परिवार में कलह के कारण उसे मानसिक आघात पहुंचा था। डॉक्टरों ने उसे बिहेवियर थेरेपी कराने की सलाह दी।
इसे भी पढ़ें; Varanasi Weather: बनारस में रात का पारा सामान्य से 5.2 डिग्री ऊपर, जानें- अगले पांच दिन तक मौसम का हाल
केस-2
बिहार के बक्सर निवासी 28 वर्षीय महिला को बार-बार हाथ-पैर में झनझनाहट के साथ झटके जैसा महसूस होता था। परिजनों के अनुसार यह समस्या रह-रहकर होती थी। बीएचयू अस्पताल में काउंसिलिंग के दौरान महिला पहले जवाब देने में हिचकिचाई, बाद में बताया कि बचपन में उसे एक बार सिर में चोट लगी थी। अब जब भी झटका आता है तो परिवार के लोग घबरा जाते हैं। फिलहाल उसकी काउंसिलिंग और थेरेपी कराई जा रही है।