इस अधिनियम के तहत निजी स्कूलों की 25 फीसदी सीटों पर कक्षा एक या पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का प्रवेश लेना होता है। इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च शासन की ओर से स्कूलों के खातों में भेजा जाता है। यह नियम सभी निजी स्कूलों को लागू करना होता है।
अभिभावकों के खाते में जाते हैं पांच हजार रुपये
कॉपी किताब के लिए पांच-पांच हजार रुपये अभिभावकों के खाते में भेजे जाते हैं। आरटीई के तहत प्रवेश के लिए तीन चरणों में ऑनलाइन आवेदन पत्र मंगाए जाते हैं। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद लॉटरी के माध्यम से अर्ह विद्यार्थियों को उनके वार्ड में मौजूद निजी स्कूलों का आवंटन होता है।
इस संदर्भ में आरटीई के जिला समन्वयक विमल केशरी ने बताया कि कोरोना महामारी की वजह से पिछले दो वर्ष में चयनित अभ्यर्थियों की अपेक्षा प्रवेश लेने वाले बच्चों की संख्या घटी है। जिन अभिभावकों ने प्रवेश नहीं लिया है, वो अगली बार के आरटीई प्रक्रिया में आवेदन कर सकते हैं।