मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि प्रदेश में मतदाता सूची शुद्धिकरण व्यापक और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत चल रहा है। 6 जनवरी को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में नो मैपिंग श्रेणी के 1.04 करोड़ और तार्किक विसंगतियों के 2.22 करोड़ मतदाता थे। कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस देना है। अब तक 1.09 करोड़ मतदाताओं को नोटिस दिया जा चुका है।
नोटिस देने के साथ ही सुनवाई की प्रक्रिया तेजी से चल रही है फिर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति गलत सूचना देकर या फर्जी फॉर्म भरकर सिस्टम को बिगाड़ने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रथम ड्राफ्ट सूची में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल हैं जो नाम छूटे हैं, उन्हें जोड़ने और आवश्यक संशोधन के लिए समय बढ़ाया गया है। मतदाता सूची से जो नाम हटाए गए हैं उसकी भी समीक्षा की जा रही। अब तक 86 लाख से अधिक आवेदनों पर सुनवाई पूरी की जा चुकी है।
उन्होंने दोहराया कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण 2026 के तहत तैयार की जा रही अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित होगी। यही आगामी चुनावों के लिए अधिकृत व स्थायी आधार दस्तावेज होगा। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्य आधारित है। किसी भी तरह की अफवाह या राजनीतिक बयानबाजी से प्रभावित नहीं होगी।
राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपा था पत्र
राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने 12 फरवरी को सर्किट हाउस में में प्रेसवार्ता की थी। उन्होंने एसआईआर पर सवाल उठाए थे और कहा था कि काशी में वोट जिहाद चल रहा है। उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में ही एक लाख मतदाता कम हो गए हैं। 30 से 40 साल की शादीशुदा महिलाएं पिता के नाम से मतदाता बनी हुई हैं। इनके नाम कई बूथों पर दो से तीन बार दर्ज हैं। ऐसा भी नहीं कि पता और पिता के नाम अलग हैं। सब एक हैं। वो भी फाइनल लिस्ट में हैं। यह बड़ी गड़बड़ी है। रविंद्र जायसवाल ने वोटरों की इस गड़बड़ी को लेकर जिला निवार्चन अधिकारी सत्येंद्र कुमार को ज्ञापन दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि 90 हजार में हमने 9200 पकड़ा है, तो आप एक बार रिवाइज करें, ताकि पूरा मामला पकड़ में आ सके।