वाराणसी। शिवाला स्थित चेतसिंह किला परिसर बृहस्पतिवार को वैदिक ऋ चाओं से गूंजित हो उठा। एक साथ 121 भूदेवों ने 11 हवन कुंडों में आहुति देकर विश्व कल्याणार्थ देवाधिदेव महादेव का अर्चन किया। अवसर था अवधूत दत्त पीठम् के तत्वावधान में हो रहे अतिरुद्र महायज्ञ के शुभारंभ का। प्रात: सात बजे किले के मैदान में बने यज्ञ मंडप में महायज्ञ की पहली आहुति दी गई। यज्ञ आचार्य बमशी कृष्ण घनपाठी एवं विशालदत्त सलक्षण घनपाठी के आचार्यत्व में भूदेवों ने अग्नि स्थापना किया।
तत्पश्चात पीठाधीश्वर गणपति सच्चिदानंद स्वामी ने श्रीचक्र देवी पूजन कर यज्ञ का शुभारंभ किया। पीठ के उत्तराधिकारी श्रीदत्त विजयानंद तीर्थ महाराज ने सभी भूदेवों का वरण एवं दक्षिणा प्रदान कर अभिनंदन किया। शाम को शास्त्रीय संगीत का आयोजन किया गया। सबसे पहले लक्ष्मण ने नादस्वर से कार्यक्रम की शुरुआत की। दूसरी प्रस्तुति विजयवाड़ा से आये मल्लादि बंधुओं की कर्नाटक शैली के शास्त्रीय गायन की रही।
11 दिवसीय अतिरूद्र महायज्ञ के अवसर पर देश-विदेश से लगभग आठ हजार श्रद्धालु काशी पहुंचे हैं। अमेरिका, जापान के अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, महाराष्ट्र आदि राज्यों के श्रद्धालु यज्ञ में शामिल हो रहे हैं।