बीएचयू अस्पताल के डिप्टी एमएस प्रोफेसर सौरभ सिंह ने बताया कि 19 मई को 74 वर्षीय मरीज को रात में 11 बजे भर्ती कराया गया था। उसका कोरोना के साथ-साथ ब्लैक फंगस का भी इलाज किया जा रहा था। उसकी रिपोर्ट भी नहीं आई है। उन्होंने बताया कि सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में अब भी 19 मरीज ऐसे हैं जो कोरोना संक्रमित है और ब्लैक फंगस के भी लक्षण हैं। ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीज के रूप में सभी का इलाज किया जा रहा है। बीएचयू के ईएनटी डिपार्टमेंट में ब्लैक फंगस के लक्षण वाले दो और मरीज बृहस्पतिवार को डॉक्टर को दिखाने पहुंचे।
यहां डाक्टर एसके अग्रवाल ने कोरोना जांच कराने की सलाद दी। डाक्टर अग्रवाल ने बताया कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद मरीजों के ब्लैक फंगस के लक्षणों की पुष्टि के लिए जरूरी जांच कराई जाएगी उसके बाद ऑपरेशन का फैसला लिया जाएगा। बताया कि पहले से भर्ती तीन और मरीजो का जल्द ऑपरेशन किया जाएगा। संभावना है कि शुक्रवार को ऑपरेशन किये जायें।
बीएचयू में ब्लैक फंगस के मरीजों के की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब 19 सदस्यीय फंगल स्टडी ग्रुप का गठन किया गया है। प्रोफ़ेसर जया चक्रवर्ती को इस ग्रुप का चेयरमैन बनाया गया हैं। एमएस ने बताया कि ग्रुप के सदस्यों को ब्लैक फंगस के साथ-साथ अन्य फंगल इंफेक्शन वाले मरीजों के इलाज के साथ ही डाटा कलेक्शन की जिम्मेदारी दी गई है।
बीएचयू में ब्लैक फंगस के भर्ती मरीजो को दो दिन में ही शासन की ओर से मिलने वाले इंजेक्शन एम्फोटेरेसिन बी इंजेक्शन की 40 डोज लगाई जाएगी। बुधवार को ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीएचयू अस्पताल के एमएस को 100 वायल इंजेक्शन दिए थे उसमें से 40 वायल मरीजों को लगाया जा चुका है। आने वाले दिनों में जरूरत के हिसाब से मरीजों को और भी इंजेक्शन दिए जाएंगे।
बीएचयू के सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में कोरोना के साथ-साथ ब्लैक फंगस भी के भी संदिग्ध मरीज भर्ती हैं। लेकिन अभी उनकी रिपोर्ट नहीं आ पाई है। इसके अलावा 6-7 ब्लैक फंगस वाले मरीजों का इलाज अन्य वार्डो में चल रहा है। बीएचयू अस्पताल के एमएस प्रोफेसर केके गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिले बुधवार और बृहस्पतिवार को मिलाकर इंजेक्शन में 40 मरीजो को लगाए जा चुके हैं।
बीएचयू अस्पताल के एमएस प्रोफेसर के के गुप्ता के मुताबिक सर सुंदरलाल अस्पताल के पुराने चेस्ट वार्ड को पोस्ट कोविड वार्ड बनाया गया है। इसमें ब्लैक फंगस के मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है। सभी मरीजों को एक जगह भर्ती कर उनका बेहतर इलाज किया जा सके। वार्ड में मरीजों को भर्ती करने की सभी तैयारियां भी पूरी कर ली गई है। धीरे-धीरे मरीजों को भर्ती किया जा रहा है जिससे कि इलाज में किसी तरह की परेशानी न हो।