काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पं. दीपक मालवीय ने बताया कि चौसठ्ठी घाट पर देवी के मंदिर में काल भैरव व एकदंत विनायक के साथ भद्र काली के सम्मुख चौसठ्ठी देवी विराजमान हैं। चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को ही चौसठ्ठी देवी ने काशी में अपना स्थान ग्रहण किया था। काशी खंड में चौंसठ योगिनियों की कथा का वर्णन मिलता है।
शिव की कृपा से पूजित हैं 64 योगिनियां
पौराणिक मान्यता के अनुसार काशी के राजा दिवोदास ने जब अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया और बाबा विश्वनाथ को भी काशी से बाहर भेज दिया। काशी नगरी में वापस आने के लिए भगवान शिव ने कैलाश से पहले अष्ट भैरव व छप्पन विनायकों को काशी भेजा। इसके बाद 64 योगिनियां काशी पहुंचीं। बाबा विश्वनाथ जब दोबारा काशी पहुंचे तो उनकी ही कृपा से चौसठ योगिनियां चौसठ्ठी देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। चौसट्ठी देवी सिद्धपीठ को भी तंत्र पीठ की प्रतिष्ठा प्राप्त है।