मणिकर्णिका घाट पर स्थित मणिकर्णिका स्थित चक्र पुष्करणी कुंड में स्नान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। काशी खंड के अनुसार गंगा अवतरण से पहले से इसका अस्तित्व है। भगवान विष्णु ने भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यहां हजारों वर्ष तपस्या की थी।
भोलेनाथ और देवी पार्वती के स्नान के लिए उन्होंने कुंड को अपने सुदर्शन चक्र से स्थापित किया था। स्नान के दौरान मां पार्वती का कर्ण कुंडल कुंड में गिरने से नाम मणिकर्णिका पड़ा। यहां पर अक्षय तृतीय पर स्नान का अधिक महत्व है।
चारों धाम का पुण्य मिलने की मान्यता
मान्यता है कि कुंड में स्नान से अक्षय फल, चारों धाम के पुण्य का लाभ मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन मणिकर्णिका घाट स्थित चक्रपुष्करणी कुंड में स्नान-दान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।