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पुण्य की डुबकी आज: कोरोना संक्रमण के दो साल बाद चक्रपुष्करणी का स्नान और मां मणिकर्णिका का शृंगार

Wed, 04 May 2022 10:33 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी में गंगा से भी प्राचीन मणिकर्णिका चक्र पुष्करणी कुंड में अक्षय तृतीया के दूसरे दिन स्नान की पंरपरा है। ऐसी मान्यता है कि कुंड में स्नान से अक्षय फल, चारों धाम के पुण्य का लाभ मिलता है। 
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अक्षय तृतीया के दूसरे दिन है स्नान की परंपरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मणिकर्णिका तीर्थ पर चक्रपुष्करणी कुंड में स्नान की परंपरा दो साल बाद फिर से निभाई जाएगी। महामारी के कारण दो साल से आयोजन बंद चल रहा था। मणिकर्णिका तीर्थ पर मां मणिकर्णिका के शृंगार व पूजन के बाद माता की शोभायात्रा निकलेगी। कुंड पर प्रतिमा को विराजमान कराने के बाद अगले दिन चक्रपुष्करणी तीर्थ का स्नान किया जाएगा।

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पुजारी परिवार की ओर से सोमवार को तैयारियाें को अंतिम रूप दिया गया। प्रधान पुजारी जयेंद्र नाथ दुबे बब्बू महाराज ने बताया कि चार मई को चक्रपुष्करणी का स्नान होगा। इसके पहले तीन मई को मां मणिकर्णिका का शृंगार व पूजन किया जाएगा। पुजारी ने बताया कि मान्यता है कि मणिकर्णिका मां की अष्टधातु की प्रतिमा प्राचीन समय में इसी कुंड से निकली थी।

ये है मान्यता
ढाई फीट ऊंची यह प्रतिमा वर्षभर ब्रह्मनाल स्थित मंदिर में विराजमान रहती है। सिर्फ अक्षय तृतीया को सवारी निकालकर पूजन-दर्शन के लिए प्रतिमा कुंड स्थित 10 फीट ऊंचे पीतल के आसन पर विराजमान कराई जाती हैं। अक्षय तृतीया पर माता का मणिकर्णिका कुंड पर शृंगार किया जाएगा। माना जाता है कि मणिकर्णिका माई के स्नान से तीर्थ कुंड का जल अगले एक वर्ष के लिए सिद्ध हो जाता है और इसी जल में स्नान करने से श्रद्धालुओं के पाप दूर होते हैं।

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गंगा से भी प्राचीन है कुंड

मणिकर्णिका घाट पर स्थित मणिकर्णिका स्थित चक्र पुष्करणी कुंड में स्नान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। काशी खंड के अनुसार गंगा अवतरण से पहले से इसका अस्तित्व है। भगवान विष्णु ने भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यहां हजारों वर्ष तपस्या की थी।

भोलेनाथ और देवी पार्वती के स्नान के लिए उन्होंने कुंड को अपने सुदर्शन चक्र से स्थापित किया था। स्नान के दौरान मां पार्वती का कर्ण कुंडल कुंड में गिरने से नाम मणिकर्णिका पड़ा। यहां पर अक्षय तृतीय पर स्नान का अधिक महत्व है।

चारों धाम का पुण्य मिलने की मान्यता
मान्यता है कि कुंड में स्नान से अक्षय फल, चारों धाम के पुण्य का लाभ मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन मणिकर्णिका घाट स्थित चक्रपुष्करणी कुंड में स्नान-दान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
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